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संयम के अस्त्र से करें आवेश का संहार
मनीष शर्मा
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महाभारत के दौरान द्रोपदी के पाँचों पुत्रों को मारकर व्यास मुनि के आम में जा छिपे अश्वत्थामा को पांडवों ने आखिरकार ढूँढ ही लिया। भीम उसे पकड़ने के लिए लपके। घबराए अश्वत्थामा ने बच निकलने का कोई रास्ता न सूझते देख हाथ में घास का एक तिनका लेकर मंत्र बुदबुदाना शुरू कर दिया।

मंत्र पूरा होते ही तिनके से जोर-जोर से अग्नि निकलने लगी। 'पृथ्वी पांडव कुलहीन हो जाए' ऐसा कहकर उसने तुरंत उस अस्त्र को छोड़ दिया। जल्द ही चारों ओर अँधेरा छाने लगा, हवा की गति बढ़ गई, उस तिनके में से अनेक शस्त्र निकलकर छूटने लगे, जिनकी तेज ध्वनि से आकाश गूँजने लगा।

यह देखकर कृष्ण बोले- अर्जुन! इस दुष्टात्मा ने बह्मास्त्र का प्रयोग किया है। इसे सिर्फ ब्रह्मास्त्र द्वारा ही रोका जा सकता है। अतः आत्मरक्षा के लिए तुम भी इसका प्रयोग करो। इस पर अर्जुन ने 'अश्वत्थामा, मेरा व मेरे भाइयों का और संपूर्ण लोक का मंगल हो। इससे शत्रु का बह्मास्त्र शांत हो जाए।' ऐसा संकल्प कर उसे छोड़ दिया।
  निश्चित ही अश्वत्थामा का अपराध अक्षम्य था। इस कारण अपनी उस गलती की सजा बतौर वह आज तक भटक रहा है। आखिर उसने ऐसे अस्त्र का प्रयोग किया था, जिसकी चपेट में आकर पांडव कुल के अलावा समस्त जीव-जंतु भी नष्ट हो जाते।      


तब दोनों संहारक अस्त्रों से निकले शस्त्र आपस में टकराकर भीषण गर्जना करने लगे। महाविनाश की आशंका देखकर व्यास मुनि ने दोनों पक्षों को फटकार लगाई और अपने-अपने ब्रह्मास्त्र वापस लेने को कहा। इस पर अर्जुन ने तुरंत उसे वापस ले लिया, लेकिन अश्वत्थामा वापस लेना नहीं जानता था, इसलिए उसने अस्त्र के लक्ष्य को अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे बच्चे की ओर कर दिया।

इस पर कृष्ण बोले- मैं उस बालक को तो पुनर्जीवित कर दूँगा। लेकिन अश्वत्थामा! अपने पापों के लिए तुम अनंतकाल तक पृथ्वी के दुर्गम स्थानों पर भटकोगे। तुम्हारे शरीर के घावों से मवाद बहेगा और दुर्गंध आएगी जिससे कोई तुम्हारे पास नहीं आ पाएगा।

दोस्तो, माफी उन्हें दी जाती है जो उसके काबिल हों। निश्चित ही अश्वत्थामा का अपराध अक्षम्य था। इस कारण अपनी उस गलती की सजा बतौर वह आज तक भटक रहा है। आखिर उसने ऐसे अस्त्र का प्रयोग किया था, जिसकी चपेट में आकर पांडव कुल के अलावा समस्त जीव-जंतु भी नष्ट हो जाते।
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