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खुद नहीं देखोगे तो लोग दिखा देंगे आईना  Search similar articles
मनीष शर्मा
बीरबल अपनी पगड़ी इतनी बढ़िया बाँधते थे कि अकबर अकसर तारीफ करते थे। इस बात से दुःखी मुल्ला दो-प्याजा ने ठान लिया कि वे बीरबल से अच्छी पगड़ी बाँधकर दिखाएँगे। इसके लिए उन्होंने अपने घर पर आईने के सामने घंटों पगड़ी बाँधने का अभ्यास किया और एक दिन बहुत ही उम्दा पगड़ी बाँधकर दरबार में पहुँचे। जो भी उनकी पगड़ी देखता, उसकी तारीफ करता। बादशाह से भी न रहा गया।

वे बोले- वाह मुल्ला साहब, आज तो आपने बीरबल को भी मात दे दी। क्यों बीरबल, तुम क्या कहते हो। बीरबल- हुजूर, तारीफ के काबिल मुल्ला साहब नहीं, उनकी बेगम हैं, जिन्होंने ये पगड़ी बाँधी है। इस पर मुल्ला बोले- यह सफेद झूठ है। पगड़ी मैंने खुद बाँधी है।

बीरबल- यदि ऐसा है, तो आप सबके सामने बाँधकर दिखाएँ। तब ताव में आए मुल्ला ने पगड़ी खोलकर बाँधना शुरू कर दिया, लेकिन वह रोज जैसी भी न बँध सकी। दरअसल वे आईने के सामने खड़े होकर ही पगड़ी बाँध सकते थे।
  बीरबल अपनी पगड़ी इतनी बढ़िया बाँधते थे कि अकबर अकसर तारीफ करते थे। इस बात से दुःखी मुल्ला दो-प्याजा ने ठान लिया कि वे बीरबल से अच्छी पगड़ी बाँधकर दिखाएँगे। इसके लिए उन्होंने अपने घर पर आईने के सामने घंटों पगड़ी बाँधने का अभ्यास किया।      


बीरबल ने इसी बात का अंदाजा लगाकर उन्हें उकसाया था, क्योंकि दरबार में आईना तो मिलने से रहा। बेतरतीब पगड़ी देखकर बादशाह ने चुटकी ली- क्यों मियाँ, बेगम के काम की वाहवाही आप लूटते हैं। इस पर सारा दरबार ठहाकों से गूँज उठा। मुल्ला साहब झेंपकर रह गए। क्या करते, बीरबल ने उन्हें आईना जो दिखा दिया था।

दोस्तो, कहते हैं कि इंसान को कोई भी काम करने से पहले आईने में अपना मुँह जरूर देख लेना चाहिए। यानी उसे यह देख लेना चाहिए कि जो काम वह करना चाहता है, उसे कर पाने की उसमें योग्यता या क्षमता है या नहीं, तभी उसे कदम आगे बढ़ाना चाहिए।
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