मीठा खाने का शौकीन एक सेठ पेट भरने के बाद भी किलो-आधा किलो मिठाई खा जाता था। परिवार वालों के बहुत समझाने पर भी उसने मिठाई खाना कम नहीं किया। एक बार उसकी तबीयत बिगड़ गई। इलाज के लिए आए वैद्य ने बताया- सेठजी, जरूरत से ज्यादा मीठा खाना आपको नुकसान दे गया और आपको मधुमेह हो गया है।
इसलिए आपको मीठा खाना बंद करना पड़ेगा। सेठ- वैद्यजी, मीठे से भी कोई नुकसान होता है भला? इससे तो शक्ति आती है। वैद्य- लेकिन ज्यादा मीठा खाने से वह जहर बन जाता है। यदि अब आप और मीठा खाएँगे तो वह आपके लिए जहर का काम करेगा। आज से आपको करेले का रस पीना होगा। करेले का नाम सुनते ही सेठ के रोंगटे खड़े हो गए, क्योंकि वह कड़वी चीज खा-पी नहीं सकता था। उसने करेला खाने से मना कर दिया।
तब वैद्य बोला- सेठजी, करेले का रस पीकर आप फिर से मिठाई खाने लायक हो जाएँगे। मिठाई के लालच में सेठ करेले का रस पीने को तैयार हो गया। धीरे-धीरे सेठ के शरीर में शकर की मात्रा संतुलित स्थिति में आ गई।
वैद्य ने उसे मुँह मीठा करने लायक मिठाई खाने की इजाजत दे दी। कुछ दिन तो ठीक चला, लेकिन धीरे-धीरे सेठ वैद्य की हिदायत को भूल गया और वह यह सोचकर ज्यादा मिठाई खाने लगा कि आज थोड़ी-सी मिठाई ज्यादा खा लूँ तो मर नहीं जाऊँगा। इससे सेठ की तबीयत दोबारा बिगड़ गई।
वैद्य ने उसे देखकर सेठानी से कहा- इस बार सामान्य करेले के रस से सेठजी ठीक नहीं होंगे। इस बार इन्हें नीमचढ़े करेले का सत पिलाना होगा। यह सुनते ही सेठ घबराकर बोला- एक तो करेला, दूसरा नीम चढ़ा। ना बाबा ना। मुझे नहीं खाना। कुछ तो दया करो वैद्यजी। मैं आगे से कभी ज्यादा मीठा नहीं खाऊँगा।
दोस्तो, कहते हैं 'अति सर्वत्र वर्जयेत' यानी किसी भी चीज की अति से बचना चाहिए। अब देखो न, ज्यादा मीठा भी जहर हो जाता है। यही बात संबंधों पर भी लागू होती है।
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