फर्नीचर के एक बहुत ही शालीन और मृदुभाषी व्यापारी की दुकान पर ग्राहकों का ताँता लगा रहता था। वह नियमों का बड़ा पक्का था। इस कारण तय समय पर दुकान खोलता और बंद कर देता था। चूँकि वह अपने परिवार को पर्याप्त समय देता था, इसलिए उसके घर वाले भी उससे खुश रहते थे।
एक दिन वह बचपन के एक दोस्त के साथ घूमने गया। दोस्त जुए का शौकीन था। वह उस व्यापारी को भी जुआघर ले गया। पहले तो व्यापारी ने भीतर जाने में आनाकानी की, लेकिन दोस्त के दबाव डालने पर वह मान गया। घर लौटते समय व्यापारी बहुत खुश था, क्योंकि पहली ही बार जुआ खेलकर वह बहुत बड़ी रकम जीत गया था। इसके बाद धीरे-धीरे उस पर जुए का नशा चढ़ने लगा।
वह अक्सर दुकान बंद कर घर जाने की बजाय जुआघर पहुँच जाता और देर रात को ही लौटता। कहते हैं कि एक लत दूसरी लत को न्योता देती है। उसने शराब पीना भी शुरू कर दिया। इससे हँसी-खुशी भरे घर का माहौल बदलकर तनावपूर्ण हो गया। जब वह जुए में हारकर आता, तो उसका गुस्सा पत्नी पर निकालता था। वह नौकरों और ग्राहकों के साथ भी बद्तमीजी से पेश आने लगा। | | फर्नीचर के एक बहुत ही शालीन और मृदुभाषी व्यापारी की दुकान पर ग्राहकों का ताँता लगा रहता था। वह नियमों का बड़ा पक्का था। इस कारण तय समय पर दुकान खोलता और बंद कर देता था। चूँकि वह अपने परिवार को पर्याप्त समय देता था। |
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इससे धीरे-धीरे उसके ग्राहक टूटने लगे। लेकिन उसने इसकी कोई फिक्र नहीं की, क्योंकि उसके सिर पर तो जुए का नशा सवार था। वह सोचता था कि जिस दिन लंबा दाँव लग गया, उस दिन सारा हिसाब-किताब बराबर हो जाएगा। लेकिन वह दिन कभी नहीं आया।
दोस्तो, नशा कोई भी हो, हमेशा नाश ही करता है। जुए के नशे ने ही एक हँसते-खेलते परिवार और अच्छे-खासे चलते व्यापार का नाश कर दिया। जब नशा उतरा तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इसलिए ऐसे किसी भी व्यसन से बचना चाहिए जो अंततः खुद के लिए अहितकर हो। फिर भले ही वह नशा जुए का हो या दारू का या किसी और चीज का। इनका नशा सिर चढ़कर बोलता है और सिर उतरवाकर ही उतरता है।
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