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चिड़ियों में हो एका तो खींच लें शेर की खाल  Search similar articles
मनीष शर्मा
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एक बार एक जंगल से गुजरते कबूतरों का एक झुंड जमीन पर पड़े दानों को देखकर वहाँ उतरने लगा। लेकिन उनके मुखिया चित्रग्रीव को शंका हुई। उसने अपने साथियों को नीचे उतरने से मना किया, पर वे नहीं माने और दाने के लालच में वहाँ बिछे जाल में फँस गए। उन्हें परेशान देख चित्रग्रीव भी वहाँ पहुँच गया। सभी कबूतर उसकी ओर हैरानी से देखने लगे।

इस पर वह बोला- मुखिया होने के नाते मैं मुसीबत के समय तुम से अलग कैसे रह सकता हूँ। अब भी कुछ नहीं बिगड़ा है। हम सब मिलकर कोशिश करेंगे तो बहेलिया हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। इसके बाद उसने मुसीबत से छुटकारे का उपाय बताया जिससे सभी के बुझे हुए चेहरे खिल उठे। उनमें एक नया जोश आ गया।

इस बीच वहाँ पहुँचे बहेलिए का चेहरा जाल में फँसे कबूतरों को देखकर खिल उठा। वह जाल की ओर बढ़ा ही था कि अचानक मुखिया के कहने पर सभी कबूतरों ने एक साथ पंख फड़ाफड़ाकर उड़ना शुरू कर दिया। और अपनी सम्मिलित शक्ति से वे जाल को साथ लेकर उड़ गए।

बहेलिए ने काफी दूर तक यह सोचकर पीछा किया कि वे सभी थककर गिर पड़ेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और वे उसकी आँखों से ओझल हो गए। सब उड़कर मुखिया के दोस्त हिरण्यक चूहे के पास पहुँचे। हिरण्यक ने तुरंत जाल काट दिया और सभी कबूतर फिर से मुक्त हो गए। वे चूहे को धन्यवाद देकर उड़ गए।

दोस्तो, कहावत है कि अगर चिड़ियाएँ एका कर लें तो शेर की भी खाल खींच सकती हैं। लेकिन समस्या यह है कि एका ही नहीं होता और वे शेर की खाल खींचने के सपने ही देखती रह जाती हैं। उन्हें इस बात का अहसास ही नहीं होता कि उन सभी का एक ही सपना है।

यदि अहसास हो जाए तो शायद वे अकेले के दम पर जो काम नहीं कर सकतीं, मिलकर कर लें, संगठन बनाकर, सम्मिलित होकर कर लें। क्योंकि संगठन की शक्ति हमेशा कल्पना से ज्यादा ही होती है, जिससे साझे सपने को आसानी से पूरा किया जा सकता है।
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