एक उड़िया लोककथा के अनुसार ब्राह्मणों के एक गाँव के हर घर में प्रतिदिन यज्ञ करने के लिए एक पवित्र हवनकुंड था। एक रात एक परिवार की बहू आधी नींद में उठकर गलती से हवनमुंड में ही पेशाब कर आई। सुबह उठकर घर के लोग कुंड में सोने की सिल्ली देखकर हैरान रह गए।
घर के चतुर मुखिया ने परिवार के सदस्यों से पूछताछ कर पता लगा लिया कि यह अनहोनी कैसे हुई। यह बात गाँव में फैलने के बाद तो रोज किसी न किसी घर से सिल्ली मिलने की खबर आने लगी। जल्द ही गाँव के प्रवेश द्वार पर बनी एक कुटिया में रहने वाले एक परिवार को छोड़कर वहाँ के सभी निवासी धनवान हो गए और उन्होंने हवेलियाँ बनवा लीं।
अब उनकी आँखों में गाँव की एकमात्र कुटिया खटकने लगी। गाँव की महिलाओं ने मिलकर उस परिवार की महिला को भी उनकी तरह धनी बन जाने के लिए उकसाया, लेकिन वह परिवार नहीं माना। इस पर गाँव वाले उसे सताने लगे। दुःखी होकर वह परिवार गाँव छोड़कर भटकते हुए दूसरे गाँव में बस गया। उसके जाते ही हवन कुंड से सिल्लियाँ निकलना बंद हो गईं, गाँव के लोग एक-दूसरे की संपत्ति हड़पने के लिए लड़ने-झगड़ने लगे। | | एक उड़िया लोककथा के अनुसार ब्राह्मणों के एक गाँव के हर घर में प्रतिदिन यज्ञ करने के लिए एक पवित्र हवनकुंड था। एक रात एक परिवार की बहू आधी नींद में उठकर गलती से हवनमुंड में ही पेशाब कर आई। सुबह उठकर घर के लोग कुंड में सोने की सिल्ली देखकर हैरान रह गए। |
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एक दिन एक व्यक्ति ने अपने पड़ोसी के घर में चुपके से आग लगा दी। तेज हवा के कारण फैली आग ने पूरे गाँव को जलाकर राख कर दिया। इधर जिस गाँव में वह गरीब परिवार जा बसा था, वहाँ हर घर के आँगन की खुदाई में सोने की सिल्लियाँ निकलने लगीं। इस पर पुराने गाँव के बुजुर्गों को यह समझते देर न लगी कि उनके यहाँ जो वैभव था, वह उसी ब्राह्मण की पुण्याई से था। उसके जाते ही सब कुछ खत्म हो गया।
दोस्तो, कहते हैं कि सौ के दुर्भाग्य पर किसी एक व्यक्ति का सौभाग्य भारी पड़ जाता है। जैसे कि हार के कगार पर खड़ी किसी टीम में अचानक किसी खिलाड़ी का भाग्य जाग जाने से वह चल निकलता है और मझधार में फँसी अपनी टीम की नैया को किनारे लगा देता है।
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