एक वृद्ध व्यक्ति अपने घर के चबूतरे पर अपने उच्च शिक्षित बेटे के साथ बैठा था। तभी एक कौआ उनके घर की मुँडेर पर आकर बैठा। पिता ने बेटे से पूछा- वह क्या है? बेटा- वह कौआ है। कुछ समय बाद पिता के प्रश्न दोहराने पर बेटे ने वही जवाब दिया।
कुछ मिनट बाद पिताने तीसरी बार पूछा तो बेटा बोला- पिताजी, अभी तो आपको बताया था कि वह कौआ है। पिता चुप हो गया, लेकिन थोड़ी देर बाद उसके फिर से पूछने पर बेटा कुछ झल्लाते हुए बोला- पिताजी, वह कौआ है, कौऽऽऽआऽऽऽ। पिता ने थोड़ा रुककर जब पाँचवीं बार पूछातो वह गुस्से में चिल्लाकर बोला- पिताजी, आखिर क्यों आप एक ही प्रश्न बार-बार पूछे जा रहे हैं। क्या आपको समझ में नहीं आता कि वह कौआ है।
इस पर पिता अपने कमरे में गया और एक पुरानी डायरी लेकर लौटा। उसने डायरी का एक पन्ना खोलकर बेटे को पढ़ने दिया।बेटे ने उस पन्नो पर लिखी पंक्तियाँ पढ़ीं- आज मैं अपने बेटे के साथ घर के चबूतरे पर बैठा था, तभी वहाँ एक कौआ आकर मुँडेर पर बैठा।
बेटे ने पच्चीस बार पूछा कि वह क्या है? मैंने खुशी-खुशी हर बार उसे जवाब दिया कि वह कौआ है। मैं उसके सवाल पर एक बार भी नहीं चिढ़ा, बल्कि मुझे उसकी मासूमियत पर प्यार आ रहा था।
दोस्तो, एक यहूदी कहावत है कि जब पिता पुत्र को देता है तो दोनों हँसते हैं। और जब पुत्र पिता को देता है तो दोनों रोते हैं, क्योंकि पिता देते समय गिनता नहीं और पुत्र गिना-गिनाकर दुःखी मन से देता है।
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