एक बार राजा जनक यज्ञ के लिए भूमि जोत रहे थे। अचानक उनका हल एक संदूक से टकराया। राजा ने उसे निकलवाकर खुलवाया तो उसमें एक नवजात कन्या निकली। वे कन्या को ईश्वर का दिया हुआ प्रसाद मानकर अपनी पुत्री की तरह बड़े लाड़-प्यार से उसका पालन-पोषण करने लगे।
कन्या चूँकि हल जोतते समय बनने वाली सीता से प्रकट हुई थी, इसलिए उसका नाम सीता ही रखा गया। साथ ही जनक की पुत्री होने के कारण उसे प्यार से जानकी भी कहा जाता था। कन्या बचपन से ही सुंदर, सुशील और गुणवती थी। बचपन में एक बार जब सीता अपनी बहनों- उर्मिला, मांडवी और श्रुतकीर्ति- के साथ गेंद से खेल रही थी, अचानक गेंद उस जगह चली गई जहाँ शिव धनुष रखा था।
सीता ने बिना झिझके उस धनुष को सहज ही उठाकर गेंद ले ली। यह देख जनक आश्चर्यचकित रह गए, क्योंकि शिव धनुष को बड़े से बड़ा वीर भी नहीं उठा सकता था। जनक को उसी दिन समझ में आ गया कि उनकी पुत्री असाधारण कन्या है जो एक दिन उनका नाम उज्ज्वल करेगी। सीता ने बड़ी होकर उनके इस विचार को सही भी कर दिखाया और अपने मायके और ससुराल दोनों का नाम रोशन किया। | | एक बार राजा जनक यज्ञ के लिए भूमि जोत रहे थे। अचानक उनका हल एक संदूक से टकराया। राजा ने उसे निकलवाकर खुलवाया तो उसमें एक नवजात कन्या निकली। वे कन्या को ईश्वर का दिया हुआ प्रसाद मानकर अपनी पुत्री की तरह बड़े लाड़-प्यार से उसका पालन-पोषण करने लगे। |
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दोस्तो, एक राजा जनक थे जिन्होंने खेत में मिली कन्या को भी अपनी पुत्री की तरह पाला। और एक आज के जनक हैं जो बेटियों के पैदा होते ही उन्हें खेत-खलिहान या कूड़े-करकट के ढेर पर मरने के लिए फेंक आते हैं। इससे भी बढ़कर भ्रूण हत्या के माध्यम से अजन्मी कन्या का अंत कर दिया जाता है।
लगता है हम फिर असुर युग की ओर बढ़ रहे हैं, क्योंकि ऐसे वीभत्स कृत्य तो आसुरी प्रवृत्ति के लोग ही कर सकते हैं। वर्ना जिनके पास एक जनक या पिता का दिल हो, उसके लिए तो बच्चा सिर्फ बच्चा है। फिर वह लड़का हो या लड़की। लेकिन न जाने क्यों, कन्या जन्म को लेकर कई लोगों के अंदर का पितृ भाव गायब हो जाता है और वह निर्दयी होकर उस मासूम की हत्या करने या करवाने से जरा भी नहीं हिचकता।
क्या यह अपराध नहीं? और क्या ऐसा करने और कराने में सहयोग करने वाले हत्यारे नहीं, अपराधी नहीं? बिलकुल हैं। हममें से जो लोग इस तरह के कृत्य को कर चुके हैं, उन्हें यह बात पता है कि उन्होंने एक गलत काम किया है और वे अपराधी हैं, हत्यारे हैं। और निश्चित ही उनकी आत्मा उन्हें कचोटती होगी, जीवनभर कचोटती रहेगी।
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