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रोड़ा न अटकाना भी सहयोग से कम नहीं
इस तरह वह पति की ताकत बनकर उसके रास्ते की सारी कमजोरियों को हटा देती है, जैसा कि हाड़ी रानी ने किया। यही जज्बा हर जीवन संगिनी में होना चाहिए। फिर उसका पति किसी भी तरह के मैदान का लड़ाका हो, सैनिक हो।

आज की गलाकाट प्रतियोगिता के दौर में हर व्यक्ति मैदान मारने के लिए जी-जान से लगा है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि उसकी जीवनसाथी उसे हिम्मत दे ताकि वह पीठ दिखाकर नहीं, बल्कि अपनी प्रतिभा के बल पर सामने वाले के दाँत खट्टे करके ही आए।

इसलिए यदि आप चाहती हैं कि आपका पति कुछ करके दिखाए तो जरूरी है कि आप कंधे से कंधा मिलाकर उसका साथ दें। यदि उसके काम में सहयोग नहीं कर सकतीं, तो काम में रोड़ा भी न अटकाएँ। यह भी एक तरह का सहयोग ही है। जब भी वह हिम्मत हारता नजर आए, उसे साहस दें।

दूसरी ओर, बहुत सी पत्नियाँ पाना तो बहुत कुछ चाहती हैं, लेकिन खोना कुछ भी नहीं। ऐसे में उनके हाथ कुछ भी नहीं आता, क्योंकि वे समझ ही नहीं पातीं कि उनकी चाह के दबाव से पति की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है। वह आगे बढ़ने की बजाय अपनी वर्तमान स्थिति को बचाए रखने के लिए ही जद्दोजहद करता नजर आता है।

ऐसे में यदि पत्नी की दखलंदाजी, टोका-टाकी बंद नहीं होती और दूसरों के मुकाबले उसे पिछड़ते देख वह आपा खो देती है तो पति और पिछड़ जाता है। यदि आप भी ऐसी पत्नी हैं तो खुद को बदलें, क्योंकि आपके सपने तभी पूरे हो सकते हैं जबआपका पति लक्ष्य प्राप्ति के लिए मानसिक रूप से तैयार हो। इसलिए उसे तनावग्रस्त न करें। यदि आप इतना करेंगी, तो बहुत कुछ पाएँगी।

और अंत में आज 'मिलिट्री स्पाउस एप्रिशिएशन डे' है। हमारी तो परंपरा रही है कि रणभूमि में जाते पति का तिलक कर पत्नी उसे विदा कर कहती थी कि भले ही सिर कटा देना लेकिन सिर झुकाकर मत आना ताकि सभी का सिर ऊँचा रहे। यही जज्बा आज भी देखने को मिलता है, तभी हमारी सीमाएँ सुरक्षित हैं। ह

म सभी को ऐसी साहसी और कर्तव्यनिष्ठ पत्नियों के लिए ईश्वर से दुआ करना चाहिए, क्योंकि उनके साहस के सहारे ही तो उनके पति पूरी शिद्दत से अपना कर्तव्य पूरा कर रहे हैं। भई वाह, आजकल आपका सिर खाया नहीं, दबाया जा रहा है।
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