रूपनगढ़ की राजकुमारी रूपवती से जबरदस्ती विवाह करने के इरादे से औरंगजेब ने अपने सिपहसालार दिलावर खान के नेतृत्व में फौज को रूपनगढ़ की ओर रवाना किया। इसका पता चलने पर रूपवती ने चित्तौड़ के राणा राजसिंह से राजपूती आन-बान-शान की रक्षा का आह्वान किया।
राणा ने अपने एक शूरवीर सरदार रत्नसिंह चूँडावत को औरंगबेज की फौज को रास्ते में रोके रखने का संदेश भेजा। रत्नसिंह उसी दिन बूँदी की राजकुमारी हाड़ी से विवाह कर राजधानी लौटे थे। संदेश मिलने पर उनका राजपूती खून खौल उठा। लेकिन जैसे ही उन्होंने हाड़ी रानी की ओर देखा, उनके चेहरे पर उदासी छा गई।
रानी ने जब इसका कारण पूछा तो वे बोले- मुझे मरने का भय नहीं, लेकिन मैं चिंतित इस बात से हूँ कि तुमने अभी विवाह का कुछ भी सुख नहीं भोगा है। इसलिए हम कल जाएँगे। रानी बोली- नहीं, आप तुरंत जाइए। हो सकता है कल तक बहुत देर हो जाए। आज अगर आपने अपनी जिम्मेदारी से मुँह फेरा तो इतिहास हमें क्षमा नहीं करेगा। | | रूपनगढ़ की राजकुमारी रूपवती से जबरदस्ती विवाह करने के इरादे से औरंगजेब ने अपने सिपहसालार दिलावर खान के नेतृत्व में फौज को रूपनगढ़ की ओर रवाना किया। इसका पता चलने पर रूपवती ने चित्तौड़ के राणा राजसिंह से राजपूती आन-बान-शान की रक्षा का आह्वान किया। |
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इसलिए कायर मत बनो। इस पर रत्नसिंह बेमन से रणभूमि की ओर चल दिए। कुछ आगे जाने उन्होंने एक सेवक को रानी के पास भेजकर रणभूमि में उनकी याद दिलाने वाली कोई निशानी मँगवाई। इस पर रानी को लगा कि कहीं वे मेरी यादों में खोकर कहीं मैदान न छोड़ दें।
इसलिए उन्होंने अपना सिर काटकर इस संदेश के साथ भिजवा दिया कि प्राणनाथ, आप अपना कर्तव्य पूरा करें। हम देवलोक में फिर मिलेंगे। रानी के त्याग से रत्नसिंह के सिर पर सवार प्रेम का भूत उतर गया और उन्होंने दिलावर खान की सेना को रणभूमि में परास्त कर रूपवती की आन की रक्षा की।
दोस्तो, बहादुर की पत्नी को बहादुर होना चाहिए, तभी वह बहादुर बना रह सकता है। कमजोर दिल की पत्नी के कारण एक साहसी भी कायर बन जाता है। एक साहसी पत्नी हिम्मत हारते पति को भी हिम्मत देकर सही रास्ते पर ले आती है।
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