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तैयार हैं न अपने नए अवतार के लिए
आप विरोध नहीं करेंगे तो सामने वाले की तो हिम्मत ही बढ़ती चली जाएगी। यदि उसे रोकना है तो कहीं न कहीं तो पहल करना ही होगी। ईश्वर ने जितने भी अवतार लिए हैं, वे सब किसी न किसी अत्याचार या अन्याय के विरोध में ही लिए हैं।

आज अक्षय तृतीया या आखातीज है। आज के दिन को अवतार का दिन कहा जा सकता है। आज के दिन अत्याचारी शासकों का अंत करने वाले भगवान परशुराम ने अवतार लिया था। आज के ही दिन नर-नारायण और हयग्रीव के रूप में भी विष्णुजी ने अवतार लिए थे। इसलिए यदि आप किसी व्यक्ति के अन्याय को सह रहे हैं तो आज हिम्मत कर उसका विरोध करें। विरोध परशुराम की तरह न हो, क्योंकि वर्तमान में ऐसा करना व्यावहारिक धरातल पर उचित नहीं है।

विरोध करने के और भी कई तरीके हो सकते हैं जो आपकी परिस्थिति के अनुसार उपयोगी हों। सबसे सही तरीका तो यह है कि सामने वाले को समझाएँ। यदि समझाने से काम नहीं चलता है तो कानून का सहारा लें, लेकिन घुट-घुटकर नहीं जिएँ। कुछ ऐसा कर दिखाएँ कि आपके जानने वाले कहें कि ये तो ऐसा न था, लगता है जैसे इसका नया अवतार हुआ है।

साथ ही अक्षय तृतीया पर दान-पुण्य की भी परंपरा है। आज के दिन किया गया दान अनंतकाल तक फल देता है, यानी उसका कभी भी क्षय नहीं होता, वह अक्षय रहता है। इसीलिए आज के दिन आप अपने अवगुणों का 'दान' करें। अधिक नहीं तो कम से कम एक अवगुण अवश्य दान करें, जिससे कि आपको सद्गुणों के रूप में उसका निरंतर फल प्राप्त होता रहे।

इससे भी आप अपने आपको बदला हुआ महसूस करेंगे यानी आपका नया अवतार होगा। तो तैयार हैं न आप अपने नए अवतार के लिए? हम तो तैयार हैं। कैसे? अरे भई, कल से भोपाल में नईदुनिया नवदुनिया के रूप में जो अवतरित हो रहा है।
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