मुख्य पृष्ठ > खबर-संसार > करियर > गुरु-मंत्र
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
बड़ा होता है वही जिसमें हो बड़प्पन
अपने बड़प्पन की वजह से ही वे अपने पड़ोसी के सामने झुककर और भी बड़े हो गए। कह सकते हैं कि ठोकर खाने के अलावा झुककर भी व्यक्ति 'ठाकुर' बन सकता है। अब आप इसे रवीन्द्रनाथ ठाकुर मानें या कोई भी ऐसा सफल व्यक्ति जिसमें बड़प्पन का गुण है।

दूसरी ओर, कई लोग थोड़ी-सी सफलता मिलने पर ही घमंड से फूल जाते हैं। उनके पैर जमीन पर नहीं पड़ते, वे हवा में उड़ने लगते हैं और बाकी लोग उन्हें अपने से छोटे लगने लगते हैं, दिखाई देने लगते हैं। यहाँ तक कि वे लोग भी, जो उनकी सफलता में कहीं न कहीं भागीदार रहे हैं।

तभी तो आदमी अकसर सफल होते ही ऐसे लोगों से अपना मुँह मोड़ लेता है, क्योंकि तब वे उसे अपने स्तर के नहीं लगते। ऐसी सोच वाले लोगों को हम छोटे दर्जे की सोच वाला कहेंगे।

ऐसे लोग सफलता के अभिमान में छोटी-छोटी बातों से प्रभावित होने लगते हैं, जबकि बड़ापन इसमें है कि आप इन बातों से ऊपर उठकर सोचें और व्यवहार करें। बड़े होकर व्यवहार की शालीनता ही तो बड़प्पन की निशानी है। यदि आप ऐसा नहीं करते तो इसका असर आप पर ही पड़ेगा। लोगों पर अपनी श्रेष्ठता का प्रदर्शन करने का प्रयास करोगे तो वे आपसे प्रभावित तो नहीं होंगे, उल्टे कहेंगे कि 'होगा अपने घर का बड़ा, हमारा क्या बिगाड़ लेगा।' जबकि यदि आपका व्यवहार शालीन होगा तो लोग खुद ही आगे रहकर आपका सम्मान करेंगे यानी आपको बड़ा मानेंगे और कहेंगे कि आदमी हो तो ऐसा।

और अंत में, आज गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की जयंती है। इस अवसर पर प्रण करें कि उनके जैसी परिस्थिति का सामना बड़प्पन का प्रदर्शन करते हुए करेंगे। अपनी सफलताओं से अप्रभावित रहकर हमेशा अपने पाँव जमीन पर टिकाकर रखेंगे।

इस तरह छोटी-छोटी बातों के चक्कर में नहीं पड़ेंगे, तभी वास्तविक अर्थों में बड़े बनेंगे, वर्ना बड़े बनकर भी छोटे रह जाएँगे। अरे भई, तारीफ के हकदार तो आप हैं। आखिर आप से ही तो सीखकर कुछ कर पाने के काबिल बने हैं, कर पा रहे हैं।
<< 1 | 2 
और भी
जब खेलो तब खेलो जब पढ़ो तब पढ़ो
लोभी गुरु लालची चेला दोऊ नरक में ठेलम-ठेला
शरीर को लाक्षागृह बना देती है ईर्ष्याग्नि
दबी जबान करवा देती है बड़ी-बड़ी क्रांतियाँ
सौतेले व्यवहार के साथ करें सौतेला व्यवहार
घास भी काटना पड़े तो काटो तरीके से