ईर्ष्या करके कभी कोई सुखी नहीं रहा। वैसे क्या आप जानते हैं कि ईर्ष्यालु होते कौन हैं? ईर्ष्यालु वे होते हैं जो असफल होते हैं। जो खुद तो अपनी अक्षमता व अयोग्यता के चलते सफल नहीं हो पाते और जब कोई दूसरा सफल होता है, तो उससे जलने-भुनने लगते हैं।
यह जलन उन्हें इतना जला देती है कि वे कुछ भी कर पाने की स्थिति में नहीं रहते। हर वक्त वे यही सोचते रहते हैं कि उस व्यक्ति का कैसे अहित किया जाए। इससे उस व्यक्ति का तो कुछ नहीं बिगड़ता, वह तो निश्चिंत होकर सफलता की राह में आगे बढ़ता जाता हैऔर उसे देखकर इनकी जलन और बढ़ती जाती है।
यदि आप भी इसी तरह के दौर से गुजर रहे हैं तो इस आग को आज ही बुझा दीजिए, क्योंकि यह तय है कि नफरत की आग एक दिन आपको ही जलाकर राख कर देगी। हो सकता है अभी कर भी रही हो।
आपको पता ही नहीं होगा कि यह अब तक आपको कितना नुकसान पहुँचा चुकी है। और यदि आपने समय रहते इस आग पर काबू नहीं पाया, इसे नहीं बुझाया तो यह आपको कहीं का नहीं छोड़ेगी। एक दिन ऐसा भी आएगा कि आप चाहकर भी इस आग को बुझा नहीं पाएँगे, या फिर बुझा भी लेंगे तो भी यह आपके जीवन में जले के ऐसे निशान छोड़ जाएगी कि आपके लाख प्रयासों के बाद भी वे निशान मिटेंगे नहीं।
इसलिए बेहतर यही है कि समय रहते मन की जलन को मिटाओ, बुझाओ। इसके लिए दूसरों की सफलताओं पर खुश होना सीखें और सभी के सुख-दुःख में काम आएँ। इस आग को बुझाने का यही तरीका है।
और अंत में, आज 'इंटरनेशनल फायर फाइटर्स डे' है। तो क्यों न इस दिन का सही उपयोग करते हुए हम बाहर की जगह भीतर की अग्नि का शमन करें यानी ईर्ष्या की आग बुझाकर तनावमुक्त हों। तो सोचना कैसा। बनें फायर फाइटर और शांत करें अपने मन में दहक रही ईर्ष्याकी ज्वालाओं को। अरे भई, तुमसे जलन दूर करने को कहा था, अपने अंदर की कुछ कर दिखाने की आग बुझाने को नहीं।
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