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दबी जबान करवा देती है बड़ी-बड़ी क्रांतियाँ
मनीष शर्मा
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एक राजा को अपनी आलोचना सुनना पसंद नहीं था। वह अपनी गलत नीतियों का विरोध करने वालों की जीभ कटवा देता था ताकि न रहे बाँस और न बजे बाँसुरी। एक बार तो एक मंत्री की जीभ इसलिए कटवा दी गई कि उसने राजा की किसी बात पर अपनी नाक सिकोड़ ली थी। इस तरह उसके राज्य में खुलकर बोलने पर पाबंदी थी।

इसका फायदा उठाकर सिपाही प्रजा पर बेरहमी से अत्याचार करते थे। इसका असर यह हुआ कि राजा तक किसी भी प्रकार की सही जानकारी पहुँचना बंद हो गई। उस तक वे ही बातें पहुँचतीं, जो उसे पसंद आतीं। यह बात पता चलने पर शत्रु राज्य के राजा ने अपने गुप्तचर भेजकर वहाँ की प्रजा को राजा के विरुद्ध भड़काना शुरू कर दिया।

त्रस्त लोग जल्द ही राजा के विरुद्ध हो गए। एक दिन मौका पाकर दुश्मन सेना ने उस राज्य पर आक्रमण कर दिया और जल्द ही महल तक पहुँचकर राजा को गिरफ्तार कर लिया। हैरान राजा के यह बात गले ही नहीं उतर रही थी कि शत्रु सेना उसके द्वार तक आ गई और किसी ने उसे बताया तक नहीं। और इस तरह वह अपनी गलत नीतियों का खुद ही शिकार बन गया।
  एक राजा को अपनी आलोचना सुनना पसंद नहीं था। वह अपनी गलत नीतियों का विरोध करने वालों की जीभ कटवा देता था ताकि न रहे बाँस और न बजे बाँसुरी। एक बार तो एक मंत्री की जीभ इसलिए कटवा दी गई कि उसने राजा की किसी बात पर अपनी नाक सिकोड़ ली थी।      


दोस्तो, इसीलिए कहते हैं कि जबान पर पहरा मत बिठाओ, क्योंकि इसका असर बहुत गहरा होता है और इसकी भारी कीमत चुकाना ही पड़ती है। तब भी न जाने क्यों उच्च पदासीन व्यक्ति या शासक अक्सर जबान पर ही सबसे पहले पाबंदी लगाते हैं।

इस तरह वे बोलने का प्रकृति-प्रदत्त अधिकार ही छीनने की कोशिश करते हैं और मुँह की खाते हैं, क्योंकि तब व्यक्ति आपके सामने कुछ न कहे, लेकिन पीठ पीछे दबी जबान में इतना कुछ कह जाता है कि वह बुलंद आवाज से ज्यादा घातक होता है। यही दबी जबान बड़ी-बड़ी क्रांतियों का कारण बनी है। इसलिए किसी को भी बोलने से न रोकें, ताकि आप उसके विचारों को जान सकें।
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