महारानी कैकेयी को मंथरा ने जब राम को युवराज बनाए जाने की सूचना दी तो उनके हर्ष की सीमा नहीं रही। वे बोलीं- इस शुभ समाचार के लिए तू मुझसे जो माँगेगी, मैं दूँगी। इस पर मंथरा ने दशरथ और राम के विरुद्ध जहर उगला।
तब कैकेयी बोलीं- अब बस भी कर घरफोड़ू कहीं की। तूने अब ऐसा कुछ भी कहा तो तेरी जीभ निकलवा दूँगी। राम मुझसे विशेष प्रेम करते हैं। मुझे भी वे भरत से भी अधिक प्रिय हैं। इसलिए तुझे भरत की सौगंध है। हर्ष के समय विषाद की बातें मत कर।
लेकिन मंथरा ने कभी चिकनी-चुपड़ी तो कभी जहर भरी बातें कर कैकेयी की मति फेरना शुरू कर दिया। उसने अपना अंतिम तीर छोड़ते हुए कहा कि तुम्हारी सौत कौशल्या को यह सहन नहीं हो रहा है कि तुम राजा की प्रिय बनी रहो। इसीलिए उसने राजा से मिलकर यह सारा षड्यंत्र रचा है। | | महारानी कैकेयी को मंथरा ने जब राम को युवराज बनाए जाने की सूचना दी तो उनके हर्ष की सीमा नहीं रही। वे बोलीं- इस शुभ समाचार के लिए तू मुझसे जो माँगेगी, मैं दूँगी। इस पर मंथरा ने दशरथ और राम के विरुद्ध जहर उगला। |
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इस प्रकार मंथरा ने सैकड़ों सौतों के किस्से सुनाकर कैकेयी के अंदर सौतेले भाव के बीज रोप दिए। इसके बाद तो कैकेयी ने वैसा ही किया, जैसा मंथरा ने चाहा। लेकिन बाद में कैकेयी जीवनभर अपनी उस एक गलती के लिए पछताती रहीं।
दोस्तो, मुँह से निकली एक चिंगारी भी इतनी शक्तिशाली होती है कि वह वर्षों के किए धरे को एक क्षण में भस्म कर दे। मंथरा ने कैकेयी को सगे-सौतेले का अंतर समझाकर राम के प्रति उनके अगाध प्रेम को कुछ समय के लिए ही घृणा में बदला और उस दौरान कैकेयी के मुँह से निकले चिंगारी रूपी वचनों ने उनके जीवनभर के दुलार को भुलाकर उन्हें एक निर्दयी स्त्री के रूप में स्थापित कर दिया।
यहाँ तक कि आज भी सौतेली माँ को उन्हीं की वजह से शंका की दृष्टि से देखा जाता है। इसलिए दूसरों के कहने पर न चलें, क्योंकि वे सिर्फ आग लगाने वाले काम ही करवाते हैं। उनका तो कुछ नहीं बिगड़ता, नुकसान हर तरह से आपका ही होता है।
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