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गोल दागने वाला ही बनता है हीरो
मनीष शर्मा
मगध की राजकुमारी चन्द्रलेखा ऐसा पति चाहती थी जो वीर हो और उसकी रक्षा कर सके। उसने उससे विवाह के लिए इच्छुक राजकुमारों से व्यक्तिगत भेंट कर उनकी विशेषताओं की जानकारी ली और अंतिम निर्णय के लिए तीन को चुना। पहला राजकुमार भूत और भविष्य की बात जान सकता था।

दूसरे के पास ऐसा रथ था, जो जल-थल और नभ में कहीं भी आ-जा सकता था। तीसरे के पास वार खाली न जाने वाली तलवार थी। अंतिम निर्णय सुनाने से पहले ही राजकुमारी के अचानक महल से गायब हो जाने से अफरा-तफरी मच गई।

पहले राजकुमार ने अपनी विद्या से जान लिया कि एक राक्षस ने उसका अपहरण कर उसे दुर्गम स्थान पर कैद कर लिया है। उसने वहाँ तक पहुँचने का नक्शा बना दिया। इसके बाद दूसरे राजकुमार के रथ ने तीनों को वहाँ तक पहुँचा दिया। तीसरे राजकुमार ने तलवार के एक ही वार से राक्षस को ढेर कर दिया और वे राजकुमारी को वापस ले आए। अब वे ले तो आए, लेकिन उस पर अपना-अपना अधिकार भी जताने लगे, क्योंकि राजकुमारी के बचने में तीनों का योगदान था।

  मगध की राजकुमारी चन्द्रलेखा ऐसा पति चाहती थी जो वीर हो और उसकी रक्षा कर सके। उसने उससे विवाह के लिए इच्छुक राजकुमारों से व्यक्तिगत भेंट कर उनकी विशेषताओं की जानकारी ली और अंतिम निर्णय के लिए तीन को चुना।      
राजकुमारी बोली- मैं तीनों से समान रूप से उपकृत हूँ, इसलिए आप ही फैसला कर लें कि मैं किसकी वधू बनूँ। यह कथा सुनाकर बेताल बोला- विक्रम, तुम्हारे अनुसार राजकुमारी पर किसका अधिकार है। विक्रम बोला- तीसरे राजकुमार का, क्योंकि उसी ने राजकुमारी के अपहर्ता राक्षस का वध किया। वह वीर था, ताकतवर था। उसके बिना दोनों राजकुमारी को छुड़ा नहीं पाते। बेताल 'ठीक कहा राजन! राजकुमारों ने भी ऐसा ही किया था' कहकर अट्टहास करता हुआ फिर पेड़ पर जाकर लटक गया।

दोस्तों, गोल तो उसी के नाम होता है जो आखिरी किक मारकर बॉल को गोल में डाल देता है। फिर भले ही उसके साथियों ने प्रतिद्वंद्वियों को काटते-छकाते हुए बॉल को वहाँ तक क्यों न पहुँचाया हो।
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