इसलिए सबसे पहले हमें अपने मन की लगाम खींच कर रखना होगी, तभी हम वह सब कर पाएँगे, जो सोच रहे हैं। विवेकी और धैर्यवान लोगों के लिए यह काम आसान होता है, क्योंकि उनका मन उनके वश में होता है। लेकिन अविवेकी और असंयमी लोग चाहकर भी मन के घोड़ों को नियंत्रित नहीं कर पाते। वे मन में उठते निरर्थक भावों को दबा नहीं पाते।
यदि आप भी ऐसे ही हैं, जो सोचते हैं कि मन को दबाना या वश में करना असंभव है, तो आप गलत हैं। यह असंभव नहीं, लेकिन कठिन जरूर है। और यदि आपने इस कठिनाई को पार कर लिया, यानी मन को जीत लिया तो फिर जीत आपकी है। वो कहते हैं न कि 'मन के हारेहार है, मन के जीते जीत।' यानी कह सकते हैं कि यदि आप जीवन की चुनौतियों का सामना कर सफल लोगों में शुमार होना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले अपने मन को जीतना होगा। इसके लिए आपको निरंतर अभ्यास की आवश्यकता होगी।
और अंत में, आज रंगपंचमी है। यह त्योहार इस भाव से मनाया जाता है कि आप पर होली के दिन जो रंग चढ़ा था, यदि वह किसी कारण से भी फीका पड़ गया है तो उसे फिर चढ़ा लिया जाए।
यानी मुद्दे की बात करें तो प्रेम, उत्साह, उमंग व संस्कारों का जो रंग हमने अपने ऊपर चढ़ाया था, यदि मन की चंचलता की वजह से उसमें कहीं भी कमी नजर आ रही हो, तो रंगपंचमी मनाकर एक बार पुनः उसे इन्द्रधनुषी आकार दे दें।
वैसे हम तो कहेंगे कि यदि आप गुरुमंत्र के नियमित पाठक हैं तो फिर आप एक तरह से रोज ही रंगपंचमी मनाते हैं, क्योंकि हम तो सद्गुणों, संस्कारों रूपी विविध रंगों की रोज ही बातें करते हैं। आप उन्हें पढ़ते, समझते और अपने मन में समाहित करते रहते हैं, आत्मसात करते हैं, ताकि जीवन में सफलता कागहरा और स्थायी रंग चढ़ सके।
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