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पूरी करें बच्चे की रुचि न थोपें अपनी सूची
दोस्तो, कहते हैं 'पूत के पाँव पालने में नजर आते हैं।' भगतसिंह और सुखदेव की बचपन की बातों से उनके माता-पिता ने को यह अंदाजा तो हो ही गया होगा कि उनका बच्चा आगे चलकर क्या करने वाला है। ऐसा ही अंदाजा आप भी अपने बच्चे को देखकर लगा सकते हैं। आप उसकी पसंद-नापसंद पर ध्यान से नजर रखें तो आपको पता चलेगा कि उसकी रुचि किस चीज में है।

दरअसल हर बच्चा कुछ नैसर्गिक गुण लेकर पैदा होता है। यदि आप उसके उन गुणों को पहचान कर उस क्षेत्र में उसके विकास पर ध्यान दें, सुविधाएँ मुहैया कराएँ, तो वह निश्चित ही अच्छा करेगा, करके दिखाएगा। क्योंकि वह उसकी अपनी पसंद का क्षेत्र जो होगा। लेकिन अधिकतर पालक बच्चे की रुचियों की तरफ ध्यान ही नहीं देते या कहें कि देना ही नहीं चाहते, क्योंकि उनके लिए बच्चे की रुचि से ज्यादा जरूरी अपनी रुचियाँ, महत्वाकांक्षाएँ होती हैं।

वे बच्चे के पैदा होने से पहले ही अपनी रुचियों की सूचियाँ तैयार करके रख लेते हैं कि वे बच्चे को क्या बनाएँगे। और बाद में वे बच्चे पर अपनी पसंदें थोपने लगते हैं। बच्चा भी मन मारकर अपने माँ-बाप के सपनों को पूरा करने में जुट जाता है। उसके अपने सपने कहीं दब जाते हैं। इस तरह वह जो करने के लिए पैदा हुआ था, वह नहीं कर पाता।

और मन मारकर करने की वजह से वह उस क्षेत्र में पूरी तरह से सफल नहीं हो पाता। इससे बेहतर है कि आप अपने पूत के पाँव पालने में देखकर उसे उसकी रुचि के क्षेत्र में विकसित करें। तभी वह सफल होकर आपका नाम रोशन करेगा। इसलिए बच्चे के मन की करें ताकि आप और बच्चा दोनों अमन से रह पाएँ।

और अंत में, कल यानी 23 मार्च को भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव का शहीदी दिवस था। वे देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देकर अमर हो गए। आज फिर देश को ऐसे ही सच्चे सपूतों की जरूरत है जो भ्रष्टाचार, दहेज, जात-पाँत, क्षेत्रवाद आदि की मानसिक गुलामी से इस देश को आजाद कराएँ। तब हम सही अर्थों में पूरी तरह आजाद होंगे, कहलाएँगे।

अरे भई, इतने बड़े बच्चे को पालने में क्यों लेटा रहे हो। 'पूत के पाँव...' का असली मतलब जानते हो?
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