एक बार भोजन की तलाश में भटकता हुआ एक सियार एक गाँव में पहुँच गया। उसे देखते ही वहाँ के कुत्ते उस पर झपट पड़े। अपनी जान बचाने के लिए घबराहट में भागते हुए वह एक धोबी के घर में नीले रंग से भरे कुंड में जा गिरा।
कुछ देर बाद वह डरते-डरते घर के बाहर निकला तो उसे देखकर कुत्तों के चेहरे पीले पड़ गए और वे दुम दबाकर वहाँ से भाग गए। हैरान सियार जंगल की ओर दौड़ा। रास्ते में पानी से भरे गड्ढे में अपनी परछाई देखकर उसे सारी बात समझ में आ गई कि उस पर नीला रंग चढ़ गया था।
जब वह जंगल में पहुँचा तो वहाँ भी उसे विचित्र जीव मानकर भय से दूसरे जानवरों के रंग उतरने लगे। जंगल के राजा सिंह ने आदेश दिया कि सभी जानवर उस विचित्र जीव से दूर ही रहें, क्योंकि जिसकी प्रकृति व बल के बारे में पता न हो, उससे मित्रता व शत्रुता दोनों ही रखनेमें मुसीबत है। ऐसा ही होने लगा।
चतुर सियार ने सोचा कि मेरे बदले रंग से डरकर जब इन सब जानवरों के रंग बदल गए हैं तो मुझे भी इन पर अपना रंग जमाना चाहिए। यह सोचकर उसने कुछ जानवरों को बुलाया और कहा- तुम लोग डरो मत। प्रजापिता ब्रह्मा ने मुझे तुम लोगों का राजा बनाकर भेजा है। सभी ने उसे राजा स्वीकार कर लिया। | | आज का दिन ही रंग मचाने का है, रंग जमाने का है, तो फिर रंग में आने में देरी क्यों? खुद भी रंगो और दूसरों को भी रंगो। लेकिन इस बात का ध्यान रहे कि कहीं भी किसी के साथ जबरदस्ती न हो। जो होली खेलना चाहे उसके साथ ही खेलो क्योंकि यह त्योहार है प्रेम का। |
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उन पर अपना रंग गाँठने के लिए उसने सिंह को प्रधानमंत्री और बाघ को गृहमंत्री बनाकर अन्य प्रमुख जानवरों को भी पद सौंप दिए। लेकिन सियारों पर लाल-पीला होते हुए बोला- इन नीच शवभक्षी प्राणियों को यहाँ से बाहर निकालो। सुरक्षाकर्मी भेड़ियों ने उन्हें धकेलकर बाहर कर दिया। इसके बाद वह रंगा सियार रंग में आ आकर खूब रंगरलियाँ मनाने लगा। अब उसे सब हरा-हरा नजर आता था।
धीरे-धीरे सभी जानवर उसके रंग में रंगने लगे। उधर अपमानित सियार उससे बदला लेने के उपाय सोचने लगे। तय हुआ कि कुछ करने से पहले उसके रंग-ढंग देखना चाहिए। उसके बाद उसका रंग बिगाड़ेंगे।
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