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फैसले से पहले विवेक से पूछ लें
यकीन मानिए, आपका विवेक कभी आपको गलत निर्णय नहीं करने देगा, क्योंकि वह करता ही नहीं है। यह तो आप हैं, जो उसकी सुनते ही नहीं। यदि आप अपनी चलाने की बजाय उसकी चलने देंगे तो कभी आपको अपने निर्णय पर पछताना नहीं पड़ेगा। इसलिए विवेक को अपनाओ। यदि वह आपके पासनहीं है तो सत्य का साथ पकड़ लो।

वह आपको विवेक तक पहुँचा देगा, क्योंकि विवेक को केवल सत्य के माध्यम से जाग्रत किया जा सकता है। और एक बार विवेक आपके अंदर जाग्रत हो गया तो समझो सोने पर सुहागा। फिर कोई आपको नहीं कहेगा कि आँख होकर भी अँधे हैं। आपकी बाह्य और अंतर्दृष्टि दोनों ठीक तरह से काम करके आपको वहाँ तक पहुँचा देंगी जहाँ कि आप खोज भी नहीं सकते, देख भी नहीं सकते।

दूसरी ओर, लोग सुविधा लेते समय तो आपके सामने गिड़गिड़ाते हैं। तब आप बिना विवेक का इस्तेमाल किए दयावश उन्हें सुविधाएँ दे देते हैं। लेकिन बाद में जब वे उन सुविधाओं का दुरुपयोग करते हैं, तो आपके कान खड़े होते हैं। इसलिए कभी भी भावनाओं में आकर लोगों की सहायता न करें।

सहायता करते समय विवेकपूर्ण दृष्टि से यह सोच लें कहीं वह आपकी सहायता का गलत फायदा तो नहीं उठाएगा, जैसा कि उस व्यक्ति ने आँख मिलने पर उठाया। इसलिए मददगार बनें, लेकिन उनके, जिन्हें वाकई मदद की जरूरत है। वे कौन हैं, यह बताएगा आपका विवेक।

और अंत में, आज 'एवरीथिंग यू डू इज राइट डे' है। अगर आप कोई भी काम विवेकपूर्ण ढंग से करते हैं, तो फिर चिंता न करें, वह सही ही होगा, होता है। कमाल है! हमने कहा था कि विवेक से काम लेना। और तुमने इस काम में विवेक को लगा दिया।
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