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फैसले से पहले विवेक से पूछ लें
मनीष शर्मा
एक बार एक गाँव में घूमते हुए ईसा मसीह की दृष्टि एक व्यक्ति पर पड़ी, जो एक वेश्या के पीछे भागा जा रहा था। यीशु ने उस व्यक्ति को रोककर ऐसा करने से मना किया। इस दौरान उन्हें लगा कि उन्होंने उस व्यक्ति को कहीं देखा है। उन्होंने पूछा- क्या तुम वही सज्जन तो नहीं जो दो वर्ष पूर्व मेरे पास अपना अँधापन दूर करने की विनती लेकर आया था।

इस पर मैंने ईश्वर से प्रार्थना की थी और उन्होंने तुम्हें तुम्हारी आँखों की रोशनी दे दी। जब उसने हामी भरी तो ईसा मसीह ने कहा कि तुम उस ज्योति का उपयोग इतने घृणित काम में क्यों कर रहे हो। उनकी बात सुनकर वह व्यक्ति शर्मिंदा होकर उनके चरणों में गिर पड़ा और माफी माँगते हुए बोला- प्रभु!

मैं आपका अपराधी हूँ। आप मुझे नेत्र-दृष्टि की जगह विवेक-दृष्टि दिला देते तो मैं पतन की राह पर चलने से बच जाता। उस व्यक्ति की बात सुनकर उस दिन यीशु ने भी सीखा कि लोगों को सुविधा दिलवाने की बजाय उन्हें सुधारने पर ज्यादा जोर दिया जाना चाहिए।

दोस्तो, वाकई यदि आपके पास विवेक नहीं है तो आँखें होते हुए भी आप अँधे ही रहेंगे, क्योंकि विवेक ही वह दृष्टि है जिसके कारण आप सोच-समझकर सही-गलत का निर्णय कर पाते हैं। इसलिए नेत्र के साथ जरूरी है कि आपमें विवेक भी हो। लेकिन समस्या यह है कि यहीनहीं होता, क्योंकि ऊपर वाला सभी को विवेक नहीं देता। तभी तो कोई व्यक्ति ऐसी गलती कर बैठता है, जिसकी उससे अपेक्षा नहीं की जा सकती। लेकिन वह भी क्या करे।
  एक बार एक गाँव में घूमते हुए ईसा मसीह की दृष्टि एक व्यक्ति पर पड़ी, जो एक वेश्या के पीछे भागा जा रहा था। यीशु ने उस व्यक्ति को रोककर ऐसा करने से मना किया। इस दौरान उन्हें लगा कि उन्होंने उस व्यक्ति को कहीं देखा है।      


विवेक के अभाव में वह गलत निर्णय ले लेता है और बाद में पछताता है। यदि आप भी गलत निर्णय लेने के बाद यह नहीं समझ पा रहे हैं कि आपसे चूक कहाँ हो गई, क्यों हो गई? तो चूक यही हो गई होगी कि आपका निर्णय या तो दूसरों द्वारा कही गई बातों से प्रभावित होगा यानी जैसा उन्होंने आपको बताया होगा, वैसा ही सही मानकर आप नतीजे पर पहुँच गए होंगे।

या फिर आपमें निर्णय लेने की क्षमता का अभाव होगा, जिसके चलते आपने खुद निर्णय न लेकर दूसरों द्वारा लिए गए निर्णय को आगे बढ़ा दिया होगा। इन दोनों ही स्थिति में चूँकि आपके निर्णय में स्वविवेक का इस्तेमाल नहीं हुआ था, तो नतीजा उल्टा आना ही था। यदि आप ऐसी स्थिति से बचना चाहते हैं तो जो बात आपको बताई जाए, कही जाए, आपके सामने आए, उस पर किसी भी नतीजे पर पहुँचने से पहले अपने विवेक से पूछ लें।
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