मुख्य पृष्ठ > खबर-संसार > करियर > गुरु-मंत्र
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
घुल-घुलकर न जिएँ, घुल-मिलकर जिएँ
मनीष शर्मा
ND
एक बार एक युवक ने गुरु से अपने दुःखों से छुटकारा पाने का उपाय पूछा। इस पर गुरु ने एक गिलास पानी और नमक का डिब्बा उसके सामने रखकर कहा- तुम एक मुट्ठी नमक इस पानी में घोलो और पीकर बताओ कि तुम्हें उसका स्वाद कैसा लगा?

युवक ने गुरु के आदेश का पालन किया और पानी पीकर मुँह बनाते हुए कहा- उफ्‌! बहुत ही खारा। इस पर वे मुस्कराए। इसके बाद वे नमक का डिब्बा लेकर उस युवक के साथ एक तालाब किनारे पहुँचे। गुरु ने अब एक मुट्ठी नमक तालाब में घोलकर पीने को कहा। युवक ने वैसा ही किया। गुरुने पूछा- क्या तुम्हें पानी में नमक का स्वाद आया? युवक- नहीं बिलकुल नहीं।

गुरु- तुम्हारे दुःख भी एक मुट्ठी नमक की तरह ही हैं। वे उतने के उतने ही रहेंगे, लेकिन उनका अहसास इस बात पर निर्भर करता है कि हमने उन्हें किस तरह के पात्र में घोला है। इसलिए जब तुम्हें कोई दुःख हो तो तुम एक गिलास बनने की बजाय एक तालाब बन जाओ यानी अपनी सहनशक्ति को इतना बढ़ा लो कि बड़े से बड़ा दुःख भी तुम्हारे मन को खारा न कर सके। युवक को बात समझ में आ गई।
  एक बार एक युवक ने गुरु से अपने दुःखों से छुटकारा पाने का उपाय पूछा। इस पर गुरु ने एक गिलास पानी और नमक का डिब्बा उसके सामने रखकर कहा- तुम एक मुट्ठी नमक इस पानी में घोलो और पीकर बताओ कि तुम्हें उसका स्वाद कैसा लगा?      


दोस्तो, सही तो है। यदि आपकी सहनशक्ति मजबूत होगी तो बड़े से बड़ा दुःख भी आपको विचलित नहीं कर पाएगा, क्योंकि वह आपकी सहनशक्ति में ही घुल जाएगा और यह घुलकर जीवन के रसों का आनंद लेना सिखाएगा यानी छोटी-छोटी खुशियों के महत्व को बताएगा। कहतेभी हैं कि जिसने दुःख न देखा हो, उसके लिए सुख का कोई मूल्य नहीं।

वैसे ही जैसे कि जब कोई पथरीली जमीन पर चला ही न हो तो उसके लिए कालीन पर चलना कोई बड़ी बात नहीं। और जो सदा कँटीले रास्तों पर नंगे पैर गुजरा हो, उसके लिए तो कांक्रीट की सड़क पर चलना भी मखमली कालीन पर चलने की तरह ही होगा। इसलिए दुःख का जिंदगी में होना भी जरूरी है।

उनसे घबराएँ नहीं, बल्कि उनसे घुलें-मिलें, उनमें घुलें-मिलें। तब वे आपके साथ ऐसे घुल-मिल जाएँगे कि आपको उनकी उपस्थिति का पता ही नहीं चलेगा। लेकिन बहुत सेलोग ऐसे होते हैं, जिन्हें जरा-जरा से कष्ट ही परेशान कर देते हैं।
1 | 2  >>  
और भी
जो है जगा, उसे किसी ने नहीं ठगा
'ठोंक-पीटकर' करें अपने गुरु का चयन
उसे जूठा तो चलता है, लेकिन झूठा नहीं
जिसे बनना है वीरु कहीं बन न जाए भीरु
रूप बदलकर होते हैं सबके सपने पूरे
पुरुष को महापुरुष बनाते हैं गुरु