विलियम हिचकॉक अपनी सब्जी की दुकान पर अंडे, ब्रेड आदि खाद्य पदार्थ भी रखते थे। उनका बेटा अल्फ्रेड बहुत शरारती था। वे उसे खूब डाँटते-फटकारते थे, लेकिन थोड़ी देर तक ठीक रहने के बाद वह फिर शरारतें शुरू कर देता।
एक बार अल्फ्रेड से दुकान में रखे कुछ अंडे फूट गए। फूटे अंडों को देखकर वह सिहर उठा कि अब पिता से उसे जमकर मार पड़ेगी। लेकिन पिता ने उसे डाँटने की बजाय एक पत्र लेकर पुलिस स्टेशन भेजा। अपने पिता के व्यवहार से हैरान अल्फ्रेड ने पुलिस स्टेशन जाकर वह पत्र इंस्पेक्टर को दे दिया जो कि विलियम का दोस्त था। इंस्पेक्टर ने वह पत्र पढ़ा और बिना कुछ कहे अल्फ्रेड को कैदखाने में बंद कर दिया। घबराकर वह रोने लगा, लेकिन इंस्पेक्टर ने उसे अनसुना कर दिया।
कुछ समय बाद उसने अल्फ्रेड को बाहर निकाला और बोला- बेटे, ऐसा उन लोगों के साथ होता है जो गलत काम करते हैं। तुम आगे से कभी ऐसा कोई काम मत करना कि तुम्हें जेल की हवा खाना पड़े। डरा-सहमा अल्फ्रेड घर चल दिया। उसके मन में यह बात हमेशा के लिए घर कर गई कि उन फूटे हुए अंडों ने उससे बदला लिया और उसे जेल की हवा खिला दी। | | विलियम हिचकॉक अपनी सब्जी की दुकान पर अंडे, ब्रेड आदि खाद्य पदार्थ भी रखते थे। उनका बेटा अल्फ्रेड बहुत शरारती था। वे उसे खूब डाँटते-फटकारते थे, लेकिन थोड़ी देर तक ठीक रहने के बाद वह फिर शरारतें शुरू कर देता। |
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दोस्तो, हम बात कर रहे हैं सस्पेंस फिल्मों के जनक अल्फ्रेड जोसफ हिचकॉक की। बचपन की उस घटना को वे कभी नहीं भुला पाए। उन्होंने कई अवसरों पर यह बात कही भी कि अंडों और पुलिस देखते ही मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
इसी तरह हम सभी को उन बातों से आज भी भय लगता है, जिनसे कि बचपन में लगता था। हाँ, समय के साथ भय के स्वरूप में परिवर्तन जरूर हो जाता है, लेकिन भय वैसा का वैसा ही बना रहता है, क्योंकि वह बाल्यावस्था में व्यक्ति के दिमाग में मजबूत जड़ें जो जमा लेता है।
हम चाहकर भी उन बातों को भूल नहीं पाते हैं, भुला नहीं पाते हैं, जिनकी वजह से उस डर ने हमारे अंदर प्रवेश किया था और एक बार प्रवेश करने के बाद तो वह भूत की तरह हावी हो जाता है। इस हवा को तो झाड़-फूँककर भी दूर नहीं किया जा सकता।
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