एक शिकारी जंगल में एक बिल्व वृक्ष पर मचान बनाकर शिकार का इंतजार कर रहा था कि वहाँ से एक हिरणी निकली। शिकारी ने जैसे ही निशाना साधा तो वह बोली- हे शिकारी! मैं अभी गर्भवती हूँ। मुझे अभी मत मार। जल्द ही मैं बच्चे को जन्म देकर तेरे पास आ जाऊँगी, तब मुझे मार लेना।
शिकारी ने उसे जाने दिया। कुछ देर बाद आई दूसरी हिरणी शिकारी से बोली- मैं कई दिनों से अपने पति से नहीं मिली हूँ। मैं उनसे मिलकर आ जाऊँ, तब मार लेना। शिकारी ने उसे भी जाने दिया। शिकार के इंतजार में भूखा-प्यासा बैठकर वह बिल्वपत्र तोड़कर नीचे फेंकने लगा। नीचे एक शिवलिंग था, जिस पर वे पत्र गिर रहे थे। इस तरह अनजाने में ही उससे शिवपूजन हो रहा था।
रात्रि के अंतिम प्रहर में अपने बच्चों के साथ आई एक हिरणी पर जब वह तीर छोड़ने ही वाला था कि वह उससे बोली- मैं इन बच्चों को अपने पति के सुपुर्द करके लौट आऊँगी, तब मुझे मार लेना। जब शिकारी ने मना किया तो उसने अपने बच्चों की दुहाई देकर उसे मना लिया। सुबह एक हिरण वहाँ से निकला। शिकारी को तीर चढ़ाते देख वह बोला- क्या तुमने मुझसे पहले आई सभी हिरणियों को मार दिया है? यदि नहीं, तो मुझे भी जाने दो। मैं ही उनका पति हूँ। | | एक शिकारी जंगल में एक बिल्व वृक्ष पर मचान बनाकर शिकार का इंतजार कर रहा था कि वहाँ से एक हिरणी निकली। शिकारी ने जैसे ही निशाना साधा तो वह बोली- हे शिकारी! मैं अभी गर्भवती हूँ। मुझे अभी मत मार। जल्द ही मैं बच्चे को जन्म देकर तेरे पास आ जाऊँगी। |
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मैं उन सबसे मिलकर तुम्हारे पास आ जाऊँगा। शिकारी ने उसे भी जाने दिया। कुछ समय बाद किसी के वापस न आने पर वह सोचने लगा कि शायद हिरणों के भोलेपन से वह मूर्ख बन गया है। तभी वह हिरण-परिवार उसके सामने आकर खड़ा हो गया। उ
नके भोलेपन, सत्यता, आपसी प्रेम और वचनबद्धता को देख शिकारी आत्मग्लानि से भर उठा। उसने उन सभी को जीवनदान दे दिया। अनजाने में किए गए पूजन से शिकारी और अपने भोले आचरण से हिरण परिवार शिवकृपा से मोक्ष के अधिकारी बन गए।
दोस्तो, देखा आपने भोलापन या मासूमियत कितनी फलदायी होती है। ऐसा भोलापन जीवन में हमेशा काम आता है। एक भोला व्यक्ति ही निष्कपट और विश्वसनीय हो सकता है। उस पर आसानी से विश्वास किया जा सकता है। अब यह तो आप जानते ही हैं कि विश्वसनीय लोगों को जीवन में आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।
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