वैसे भी दोनों पक्ष आपके सामने अपनी समस्याएँ रखते भी इसलिए ही हैं क्योंकि उन्हें आप पर विश्वास होता है कि आप उनकी बात समझेंगे और बीच-बचाव का कोई रास्ता निकालेंगे। यदि ऐसे में आप दाएँ-बाएँ या अगल-बगल का रास्ता चुनने लगेंगे तो भटक जाएँगे। यहाँ तो बीच का रास्ता ही काम आता है। तभी आप बीच-बचाव करा सकते हैं।
लेकिन आमतौर पर होता इसके उलट है। आदमी यह सोचकर कि यदि दोनों पक्षों के बीच पटरी बैठ गई तो उसे पूछेगा कौन, वह दोनों के रिश्ते सुधारने की बजाय उनके बीच की खाई और बढ़ा देता है। इसके लिए वह बेमतलब की बातें इधर की उधर और उधर की इधर करता रहता है, जबकि ऐसी बातें उससे की ही इसलिए जाती हैं कि सामने वाले को विश्वास होता है कि यह बात को इधर-उधर नहीं करेगा।
यदि आप भी ऐसा ही करने में यकीन रखते हैं तो हम बता दें कि दोनों पक्षों के बीच बढ़ती खाइयों में एक दिन आपको ही गिरना पड़ सकता है। क्योंकि एक न एक दिन जब सच्चाई सामने आएगी तो आप न इधर के रहेंगे न उधर के। वे दोनों एक हो जाएँगे और आपसे तौबा कर लेंगे। इसकी बजाय यदि आप भी उस युवक की तरह इधर की उधर करने की बजाय दोनों को मिलाएँगे तो आप हमेशा इधर के भी रहेंगे और उधर के भी यानी दोनों के स्नेह के पात्र बने रहेंगे।
इसलिए आज 'सेंडविच डे' पर आप यह निर्णय लें कि आप दो पाटों के बीच नहीं पिसेंगे, सेंडविच नहीं बनेंगे। हमेशा सकारात्मक तरीके से मामला निपटाएँगे। फिर मामला चाहे आपके व्यक्तिगत जीवन का हो या व्यावसायिक जीवन का। यदि आप ऐसा करेंगे तो आपको मिलेगी एक सुकूनभरी जिंदगी।
चलो, अब माँ और बीबी ने मिलकर जो क्लब सेंडविच बनाया है, उसका मजा लिया जाए।
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