अनजानों की तो छोड़ो, आपके अपने ही संगी-साथी आपको भाव देना बंद कर देंगे। इसलिए अपने चेहरे के भाव बदलकर मुस्कराओ। फिर देखो, आपको कैसे भाव नहीं मिलते। वैसे भी मुस्कराता चेहरा सभी को पसंद आता है। यह दूसरों को भी ताजगी देता है।
दूसरी ओर, मुस्कराने से गजब की आंतरिक शक्ति मिलती है। इससे आप खुद को तरोताजा महसूस करते हैं। थकान आपके आसपास भी फटकने से डरती है। और मुसीबत तो आने से पहले सौ बार सोचती है, क्योंकि सदा मुस्कराने वाला व्यक्ति किसी भी मुसीबत का सामना उसी तरह मुस्काराते हुए ही कर लेता है। उसे देखकर कोई यह नहीं कह सकता कि वह तकलीफ में है। यही बात उसे रिलीफ देती है और रिलीफ में ले आती है यानी मुसीबत टल जाती है। यदि आप भी तकलीफ में ऐसा ही करेंगे तो आपको भी रिलीफ मिलने में देर नहीं लगेगी।
वैसे व्यावसायिक जीवन में तो सफलता का सबसे बड़ा अस्त्र ही मुस्कराहट है। जिस संस्था के लोग शिष्टाचार का पूरी तरह से पालन करते हैं, जिनमें व्यवहार करने का सलीका है, जिनकी वाणी शहद घोलती है और मुस्कराता चेहरा खुशबू बिखेरता है, उस संस्थान को आगे बढ़ने से न कोई रोक सकता है, न रोक पाया है।
इसीलिए किसी ने कहा है कि यदि चलाना चाहते हो दुकान तो बिखेरो मुस्कान ही मुस्कान। जो पहले से ही बिखेर रहे हैं, उनकी दुकानें मजे से चल भी रही हैं। यदि आप भी सफल होना चाहते हैं तो मुस्कान को अपने व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा बना लें और फिर देखें कमाल। अरे भाई, क्या अभी भी चेहरा लटकाकर बैठे हो। मुस्कराओ भाई मुस्कराओ।
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