एक बार दरबार में देर से पहुँचने पर बीरबल ने अकबर को सफाई दी- हुजूर, पत्नी के काम से बाजार चला गया था, इसलिए देर हो गई। बादशाह बोले-क्या जोरू के गुलामों जैसी बात करते हो। इस बात पर दरबार ठहाकों से गूँज उठा। बीरबल भी खीझकर रह गए। बात आई गई हो गई।
कुछ समय बाद बीरबल ने अकबर से एक फरमान जारी करवाया कि किसी भी व्यक्ति का बीबी से डरना साबित हो गया तो वह बीरबल को एक मुर्गा देगा। कुछ ही दिनों में बीरबल के घर में इतने मुर्गे हो गए कि और मुर्गों के लिए जगह नहीं बची। बीरबल ने बादशाह से फरमान वापस लेने की गुजारिश की, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। वे बीरबल से बोले कि आप कुछ और बात कीजिए।
बीरबल बोले- जो हुक्म। पता चला है कि पड़ोसी मुल्क की शहजादी एकदम जन्नात की हूर है। आपको उससे निकाह कर मलिका बना लेना चाहिए। अकबर सकपकाते हुए बोले- धीरे बोलो बीरबल। हमें मरवा दोगे। जानते नहीं जनानखाने में एक नहीं दो-दो मलिकाएँ बैठी हुई हैं। तब बीरबल झट से बोले- तो लाइए हुजूर दो मुर्गे। आप तो जोरुओं के गुलाम हैं।
भई, यह भी खूब रही। वैसे यह बात सही है कि आदमी बाहर कितना ही शेर बन ले, घर में तो उसे भीगी बिल्ली बनकर ही रहना पड़ता है, भले ही वह इसे स्वीकार न करे। जैसे कि बंता ठाकुर ने स्वीकार नहीं किया था। जब उससे संता यादव ने पूछा-भई, बंता तू बाहर शेर, लेकिन घर पर भीगी बिल्ली क्यों बनता है। बंता बोला-अरे यार, घर पर भी मैं शेर ही रहता हूँ, लेकिन वहाँ शेर के ऊपर मातारानी सवार हो जाती है। अरे आप हँस रहे हो। क्या अपनी हालत पर। खैर छोड़ो, ये तो चुटकुलेबाजी थी।
हाँ, लेकिन यहाँ सोचने वाली बात यह है कि क्या वास्तव में अधिकतर पतियों की हालत ऐसी होती है या यह सिर्फ मजाक का विषय है। ऊपरी तौर पर तो यह मजाक या हास्य का हिस्सा ही लगता है, लेकिन गहराई में झाँकें तो पता चलेगा कि ज्यादातर पति अपनी पत्नियों के मामले में ऐसा ही करते हैं। यानी बाहर तो शेर और घर में ढेर। अब इसके अच्छे और बुरे, दोनों तरह के कारण हो सकते हैं। अच्छे इन मायनों में कि जब पति अपनी पत्नी की केयर करता है तो डरता है कि कहीं कोई कमी न रह जाए।
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