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बेवजह न आने दें संबंधों में खटास
इसलिए बेहतर यही है कि पहले क्रास चेक कर लें कि कहीं आप ही तो उलटा नहीं सोच रहे हैं। यदि आपने ऐसा करना शुरू कर दिया तो आप बहुत से उन तनावों से मुक्त हो जाएँगे, जो बेकार में आपको परेशान कर आपकी ऊर्जा को नष्ट करते हैं।

यह बात तब भी काम आती है जब आप किसी नए व्यक्ति के संपर्क में आते हैं। अकसर लोग सामने वाले को पूरी तरह जाने-समझे बिना उसके चरित्र और व्यवहार के बारे में निर्णय ले लेते हैं। यह तरीका गलत है। ऐसे में यदि आप अपने दिमाग में उसकी उलटी छवि बना लेंगे तो फिर वह हमेशा उलटा ही नजर आएगा।

इस तरह के लोग जीवन में अकसर परेशान रहते हैं। ऐसे लोग जब किसी नई संस्था में जाते हैं तो वहाँ के माहौल के साथ आसानी से सामंजस्य नहीं बैठा पाते। उन्हें छोटी-छोटी बातों में भी खामियाँ नजर आने लगती हैं। इसका सीधा नुकसान आखिर में इन्हीं को उठाना पड़ता है। इसलिए बेहतर यही है कि पहले वस्तुस्थिति को समझ लें ताकि बाद में किसी उलझन में न फँसें।

यही बात अपनी सास को न समझने वाली बहुओं पर भी लागू होती है। ससुराल में बहू जब नई-नई आती है तो नए वातावरण में वह डरी-सहमी रहती है। उसे लगता रहता है कि कहीं कोई गलती न हो जाए। वरना लोग क्या सोचेंगे।

वह बहुत असहज रहती है। ऐसे में गलती होने पर जब उसकी सास कुछ कह देती है तो उसकी असहजता उसे छोटी-सी बात को बड़े रूप में लेने पर मजबूर कर देती है और वह अपनी सास को अपना विरोधी मानने लगती है। ऐसे में बेवजह संबंधों में खटास पैदा हो जाती है। इसलिए बेहतर यही है कि किसी नतीजे पर पहुँचने से पहले उस बहू की तरह सही-गलत को जाँच लें।

अंत में, आज 'मदर-इन-लॉज डे' है। सास भी माँ से कम नहीं होती। यदि आप उन्हें सम्मान देंगी तो वे भी आपको लाड़ करेंगी। यदि किसी गलतफहमी की वजह से आपकी अपनी सास से पटरी नहीं बैठ पा रही है तो आप उन्हें समझने की कोशिश करें। हो सकता है कि आपको संबंधों को सुधारने का कोई उपाय सूझ जाए। तो आपका आज का दिन है आपकी सास के नाम।
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