यमलोक लाए गए एक सयाने बनिये का पाप-पुण्य बराबर था। इस पर धर्मराज ने उससे स्वर्ग या नरक का चयन खुद ही करने को कहा। प्रसन्न बनिये ने फैसला लेने से पहले दोनों लोक देखने की बात कही। एक यमदूत उसे लेकर स्वर्ग पहुँचा। वहाँ उसे वही सब दिखा जो उसने सुन रखा था।
अब बारी नरक की थी। नरक के बारे में सोचकर उसके रोंगटे खड़े हो रहे थे। लेकिन जब द्वार पर पहुँचा तो उसे अलग ही अनुभव हुआ। एक सुंदर-सी युवती हार-फूल और तिलक से स्वागत कर उसे अंदर ले गई। वहाँ उसे पब, मॉल, मल्टीप्लेक्स आदि के चित्र दिखाकर बताया गया कि यहाँ एशो-आराम की ये तमाम चीजें हैं। यहाँ उसे घर जैसा ही माहौल मिलेगा।
इस चमक-दमक के बारे में जानकर उसे लगा कि धरती के लोगों ने बेकार ही नरक को लेकर हौवा खड़ा कर रखा है। स्वर्ग में तो एकरसता है जबकि यहाँ सभी तरह के रस हैं। उसने फैसला किया कि वह नरकवासी ही बनेगा। धर्मराज की आज्ञा से उसे नरक के द्वार पर छोड़ दिया गया। अंदर जाने के लिए जैसे ही उसने पैर बढ़ाया तो भयावह चेहरों ने उसे खींचकर सलाखों से बाँध दिया और लगे उसे यातनाएँ देने।
बनिये ने कराहते हुए पूछा- यह सब क्या है? वे तमाम सुविधाएँ कहाँ हैं, जिनके बारे में बताया गया था। इस पर एक बोला- वह सब बताने वाले हमारे मार्केटिंग विभाग के थे। उन्होंने अपना लक्ष्य पूरा करने के लिए ही तुझे सपने दिखाए, ताकि तू स्वर्ग न चला जाए।
बेचारा बनिया! नरक की झूठी चमक-दमक के झाँसे में पड़कर वह गलत चयन कर बैठा। इसलिए कहते हैं कि आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर कोई फैसला नहीं करना चाहिए। क्योंकि हो सकता है कि ऊपर से आपको जो दिख या दिखाया जा रहा है, वैसा हो ही नहीं।
इसलिए किसी नतीजे पर पहुँचने से पहले खोल की पोल जान लें वर्ना आपका ढोल बज सकता है। लेकिन क्या करें। यह सब जानते हुए भी आए दिन लोग ऊपरी चमक-दमक के झाँसे में आ जाते हैं और गलत निर्णय कर बैठते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लोगों को यह गलतफहमी होती है कि वे बहुत सयाने हैं और कोई उन्हें बना नहीं सकता।
यदि आप भी ऐसा सोचते हैं तो इससे बड़ी मूर्खता की बात कोई हो ही नहीं सकती, क्योंकि बाजार में आप जैसे लोगों को बनाने के लिए एक से एक सयाने बैठे होते हैं। इसलिए हर तरह से सोच-विचारकर निर्णय लें ताकि बाद में उस बनिये की तरह पछताना न पड़े।
|