चूँकि हमारे यहाँ की औसत आयु साढ़े तेईस वर्ष है और यह वर्ग ही मोबाइल का सबसे ज्यादा उपयोग करता है। इसलिए इस क्षेत्र के मुख्य खिलाड़ी युवा क्षेत्र को ही अपना लक्ष्य बनाया है। कुछ कंपनियाँ तो इन्हें पकड़ने के लिए कॉलेज और कोचिंग सेंटर पर डेरा डालकर अपना जाल बिछाए तैयार बैठी रहती हैं। भले ही यह उनके व्यापार की रणनीति ही क्यों न हो।
दाम नीचे, ग्राफ ऊपर भारत में औसत टैरिफ 1 रुपया 74 पैसे प्रति मिनट है। 40 देशों में यह 5 रुपए 67 पैसे है। जर्मनी में सबसे अधिक 14 रुपए 40 पैसे प्रति मिनट लगते हैं। वहाँ प्रत्येक उपभोक्ता प्रति माह मात्र 74 मिनट बातें करता है। जब बात राजस्व की आती है तो भारतीय ऑपरेटरों की झोली सबसे ज्यादा खाली होती है। जहाँ अमेरिका का ऑपरेटर प्रति उपभोक्ता 2400 रुपए कमाता है, भारतीय ऑपरेटरों को प्रति ग्राहक मात्र 470 रुपए ही मिल पाते हैं। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में 30 वर्ष से कम आयु वाले 62 प्रतिशत ग्राहक हैं।
मेवा वेल्यू एडेड सेवा का 2006 के अंत तक भारत में वेल्यू एडेड सेवा का बाजार 2850 करोड़ रुपए का है। आईएएमएआई का मानना है कि मोबाइल वेल्यू एडेड सेवा में खासी तेजी दिखाई दे रही है। मार्केट रिसर्च एंड कंज्यूमर रिसर्च ऑर्गनाइजेशन द्वारा किए गए एक अध्ययन में कहा गया है कि कंपनियों ने व्यावहारिक रूप से कुल रिंग टोंस, गेम्स, स्क्रीनसेवर्स तथा ई-मेल अलर्ट में माध्यम से युवा बाजार निर्मित किया है, जिसके परिणामस्वरूप ज्यादा से ज्यादा युवा अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए वायरलैस एप्लिकेशंस का उपयोग करने लगे हैं।
दूसरी ओर बुजुर्गवार लोग मोबाइल पर ज्यादा समय या पैसा बरबाद करना बेकार समझते हैं। फिर भी भारत जैसी आबादी वाले देश में जहाँ 60 फीसदी से ज्यादा आबादी मोबाइल को अपनी हथेलियों में थामे हुए हैं, उसे देखते हुए टेलीकॉम इंडिया का भविष्य उज्ज्वल है।
(लेखिका आईएमटी, गाजियाबाद में स्टूडेंट मैनेजर हैं।) |