मैं यह तो नहीं कहूँगा कि मन पर नियंत्रण रखना कोई सरल काम है, लेकिन इतना तो जरूर कहना चाहूँगा कि यह बहुत कठिन भी नहीं है। इसके लिए कुछ तरीके इस प्रकार हो सकते हैं-
1. इस बात पर विश्वास करें कि चिंता करने से कुछ नहीं होता है। काम करने से होता है। इसलिए पढ़ाई करें। अपने आपको पढ़ाई में जितना अधिक झोंक देंगे, चिंता करने की गुंजाइश उतनी कम रह जाएगी।
2. परीक्षा के भय को मन से निकाल दें। यह बिलकुल मत सोचिए कि परीक्षा में न जाने क्या पूछा जाएगा। आप अभी तक न जाने कितनी परीक्षाएँ दे चुके हैं। क्या आप बता सकते हैं कि उनमें ऐसा कुछ पूछा गया था, जो कोर्स से बाहर था? यदि आप उस समय पास हो गए हैं तो इसबार भी पास होंगे। जो भी पूछा जाता है लगभग-लगभग कोर्स से ही पूछा जाता है। इस तथ्य पर विश्वास रखिए।
3. जब भी आपका मन परीक्षा के बारे में सोचकर बेचैन होने लगे, अपने सोचने की दिशा को बदल दीजिए। कुछ और सोचने लगें और वह भी अच्छा-अच्छा।
आपकी चिड़चिड़ाहट का कुछ संबंध आपके खान-पान और नींद से भी होता है। आपने देखा होगा कि भूखा बच्चा चिड़चिड़ाता है। आपने देखा होगा कि नींद से भरा हुआ बच्चा भी चिड़चिड़ाता है। आपको भले ही इस बात का अहसास न हो, लेकिन सच्चाई यही है कि अभी आपकी भूख भी कम हो गई है और नींद भी, जबकि अभी आप ज्यादा मेहनत कर रहे हैं। इसलिए आपके शरीर को अधिक ऊर्जा चाहिए। साथ ही चूँकि आप अधिक मेहनत कर रहे हैं, इसलिए आपको नींद भी अच्छी आना चाहिए।
चूँकि आप खाना ठीक से नहीं खा पा रहे हैं, इसलिए नींद भी अच्छी नहीं आ पा रही है। अतः यदि आपको अपने को संतुलित रखकर परीक्षा में अच्छे नंबर लाने हैं तो आपके लिए यह जरूरी होगा कि आप अपने खान-पान पर ध्यान दें और सोने पर भी। आप इस गलत-फहमी में न रहें कि इस दौरान जितना अधिक पढ़ लेंगे, उतने ही अधिक नंबर मिलेंगे। शरीर और मस्तिष्क के विज्ञान की यह माँग है कि आप उनसे उतना ही काम ले सकते हैं, जितने के लायक वे बने हैं। आपकी जोर-जबर्दस्ती से कुछ होने वाला नहीं है।
इस दौरान आप किसी भी तरह का कोई व्यवधान बर्दाश्त नहीं कर पाते; चाहे यह व्यवधान आपके बीमार पड़ने से हो रहा हो या बीमारी की तीमारदारी करने से हो या फिर घर में मेहमानों के आ जाने से। एक तो मेहमानों को इस समय खुद भी समझना चाहिए और यदि वे नहींसमझते हैं तो आप मेहमानों के बहुत जरूरी काम निपटाकर अपनी पढ़ाई में लग जाएँ। अनावश्यक रूप से चिड़चिड़ाए नहीं। मेहमान के सामने पूरी विनम्रता के साथ अपनी स्थिति का खुलासा कर दें। उनके बेहद जरूरी कामों को निपटा दें। इस दौरान आप मेहमानदारी के काम को अपना मनोरंजन समझ लें।
यदि आप प्रसन्न मन से मेहमान के कामों को पूरा करेंगे, तो आप देखेंगे कि आपको एक अजीब तरह का संतोष मिलेगा और आपका मन स्थिर हो जाएगा। आखिर काम तो आप करेंगे ही, चाहे चिड़चिड़ाकर करें या खुश मन से करें। तो क्यों न इसे प्रसन्न मन से ही किया जाए। मुझे लगता है कि इन कुछ तरीकों क
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