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जापान : अवसरों की खान
Japan
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आजकल शिक्षा और व्यवसाय में बढ़ते हुए अवसरों को ध्यान में रखकर भारतीय छात्रों में विदेशों में उपलब्ध होने वाली उच्च शिक्षा और अनुभवों के प्रति एक विशेष जागरुकता आई है।

जापान में यूनिवर्सिटी शिक्षा 12 साल प्राथमिक तथा माध्यमिक शिक्षा प्राप्त करने के उपरांत ही संभव होता है। स्नातक स्तर की पढ़ाई यहाँ 4 साल की है और 6 साल मेडिसीन एवं दंत चिकित्सा के लिए तथा 2 वर्ष स्नातकोत्तर और 3 वर्ष डॉक्टर प्रोग्राम के लिए निर्धारित है।

प्रत्येक साल के 1 अप्रैल से जापान के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई की शुरुआत होती है जो दो सेमेस्टर में विभक्त होती है, लेकिन यहाँ शिक्षा प्राप्त करने वाले इच्छुक छात्रों को विश्वविद्यालयों में प्रवेश से पहले जापानी भाषा को भलीभाँति जानना होगा, क्योंकि इन विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रम का माध्यम जापानी ही है।
यद्यपि कि कुछ विश्वविद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम का प्रचलन है, परंतु जापानी भाषा का ज्ञान होना आवश्यक है।

जापानी प्रोफिसियंसी टेस्ट जो एआईईजे तथा जापान फाउंडेशन के सौजन्य से टोकियो, ओसाका और 31 विभिन्न देशों भारत सहित (नई दिल्ली एवं पुणे) में आयोजित किया जाता है। इस प्रतियोगी परीक्षा को चार स्तरों में बाँटा गया है जिसमें प्रथम स्तर की अर्हता शर्त पूरी होनी चाहिए।

प्रतियोगी परीक्षा के द्वारा विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाना काफी कठिन और चुनौतीपूर्ण है। स्कॉलरशिप तथा फेलोशिप जैसे प्रावधान भी यहाँ की यूनिवर्सिटी में संभव है।

जापान सरकार मानबूशो स्कॉलरशिप तकरीबन 18 वोकेशनल छात्रों, शोधकर्ताओं और स्नातक स्तर के विद्यार्थियों को प्रदान करता है। जापान फाउंडेशन फेलोशिप प्रोग्राम सामाजिक विज्ञान एवं आर्ट्‌स विषयों के मेधावी छात्रों को दिया जाता है।
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