तीसरा कदम द्वितीय वर्ष की परिक्षाएँ समाप्त होते ही आपको विदेश जाने की पूर्व तैयारी के व्यवहारिक पहलू की ओर ध्यान देना चाहिए।
यदि आपका पासपोर्ट नहीं है, तो सबसे पहले उसके लिए आवेदन करे।
आप जिस पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के इच्छुक है, उसके लिए प्रदान की जाने वाली स्कॉलरशिप की ओर ध्यान केंद्रीत करें, साथ ही बैंक से मिलने वाले शिक्षा ऋण आदी की जानकारी निकाल कर खुद को अधिकारिक औपचारिकताओं के लिए तैयार रखें। प्रवेश परीक्षा की तैयारी में जुट जाए और यदि स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए कार्यानुभव आवश्यक है, तो पढ़ाई के साथ कहीं काम भी करें। तृतीय वर्ष की थोड़ी बहुत पढ़ाई कॉलेज खुलने से पहले ही प्रारंभ कर दें, क्योकि तृतीय वर्ष के दौरान ही प्रवेश परीक्षाओं में बैठने की वजह से पढ़ाई में व्यवधान आते है।
चौथा कदम अब बारी आती है चौथे और अंतिम कदम की। किताबी ज्ञान आप बहुत ले चुके अब व्यवहारिकता की ओर बढ़े।
अब आप स्वयं में लचीलापन लेकर आए और अपने खान-पान और स्वास्थ्य आदि की जिम्मेदारी खुद उठाना शुरू करें। इसका फायदा यह होगा कि विदेश जाने के बाद आप होमसिकनेस से बच जाएँगे।
वीसा इंटरव्यू और उस देश (जहाँ आप जाने चाहते है),के बारे में जानकारियाँ प्राप्त करें और खुद को वहाँ रहने के अनुरूप तैयार करें।
सीनियर छात्रों, दोस्तों या रिश्तेदारों की मदद से वहाँ के कुछ संपर्क सूत्र निकालने की कोशिश करें। निरंतर सिकुड रही दुनिया में अब यह काम आसान है। इस तरह संपर्क मालूम होने से आप निश्चिंत रहेंगे और किसी संकट के समय यह आपके लिए मददगार साबित होंगे। तो अब देर किस बात की, यह चार कदम चलकर अपने पंखों को मजबूत बनाएँ और फिर अपने आसमाँ में उड़ान भरें।
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