नई ऊर्जा देने वाली रही कॉन्क्लेव

गीता कामयाबी की कुंजी है-चौधरी
इंदौर, रविवार, 8 नवंबर 2009( 23:34 IST )
ज्ञान की बातें, मैनेजमेंट के फंडे, अनुभवों का संप्रेषण, भाषाई उत्कृष्टता व श्रोताओं को बाँधे रखने की कला अभय प्रशाल में बखूबी दिखाई दी। नेतृत्व क्षमता के बारे में युवा कितनी दिलचस्पी लेते हैं यह बात यहाँ रविवार को एक बार फिर जानने को मिली।
आईएमए द्वारा आयोजित इंटरनेशनल मैनेमजमेंट कॉन्क्लेव-09 के समापन दिवस पर 4 वक्ताओं ने अपनी बात जिस खूबसूरती व सहज तरीके से कही उसने युवाओं को नई चेतना व ऊर्जा से सराबोर कर दिया।
औपचारिकताओं के परकोटे को तोड़ते हुए इस दिन कार्यक्रम की शुरुआत सीधे अतिथि वक्ताओं के वक्तव्य से हुई। दो सत्रों में विभाजित कार्यक्रम में प्रथम वक्तव्य के रूप में विजय बत्रा ने प्रेरणास्पद बात कही। इसके बाद पवन कुमार सिंह, बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉ. जॉर्ज जूडा व मैनेजमेंट गुरु अरिंदम चौधरी ने ज्ञान का पिटारा खोला।
कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि सभी वक्ताओं ने 'ट्रांसफार्मिंग लीडरशिप फ्रॉम आइडिया टू आईकॉन' विषय पर अपने विचार व्यक्त करने का माध्यम चुनने के लिए प्राथमिकता हिन्दी को दी। जिन्होंने अंगरेजी में विचार व्यक्त किए उन्होंने भी हिन्दी का साथ कहीं न कहीं निभाया।
जरूरत है जागरूक जागरुक रहने की : एक अच्छा लीडर वह है जो स्वयं के बजाय साथियों के लिए कार्य करता है। अपने साथ में कार्य करने वालों की समस्याओं, भावनाओं और बातों को जो समझे वही बेहतर नेतृत्व क्षमता का धनी होता है। यह बात विजय बत्रा ने पहले सेशन के पहले चरण में कही।
बत्रा ने बहुत ही हल्के-फुल्के अंदाज में अपनी बातें युवाओं तक कुछ इस तरह पहुँचाई कि उल्लास का रंग दिनभर बना रहा। उन्होंने कहा कि किस्मत को कोसने के बजाय अपने अन्दर झाँकें। हम सभी में ज्ञान की कमी नहीं है जरूरत है तो मस्तिष्क को जागरूक रखने की। आप जो भी कार्य करें उसे केवल धनोपार्जन का जरिया मानने के बजाय विशेष उद्देश्य के साथ कार्य करें।
मन, वचन, कर्म की त्रिवेणी में नहाए वही नेता है : सत्र के दूसरे वक्ता थे प्रो. पवनकुमार सिंह। इन्होंने संस्कृत और हिन्दी का चयन करते हुए नेतृत्व क्षमता की बात कही। प्रो. सिंह ने कर्म से ज्यादा भावना पर जोर देते हुए कहा कि एक नेता को अपने साथ कार्य करने वालों की भावना को ध्यान में रखते हुए कार्य करना चाहिए यदि भावना को दिशा नहीं मिलेगी तो कर्म कैसे होगा और भावना ही आपको आगे ले जाती है।
युवाओं को उन्होंने पहले भाषा सुधारने और फिर कम्युनिकेशन स्कील डेवलप करने की बात कही। प्रो. सिंह के अनुसार हर इनसान में मन, वचन और कर्म की त्रिवेणी है जिसमें नहाने पर ही नेतृत्व क्षमता विकसित होती है।
गीता सफलता की कुंजी : कार्यक्रम के दूसरे सत्र में मोटीवेशनल व मैनेजमेंट गुरु अरिंदम चौधरी ने महाभारत के उदाहरणों का सहारा लेते हुए नेतृत्व क्षमता की बात समझाई। साम, दाम, दंड, भेद को किस तरह आज भी प्रयोग में लाकर कैसे सफलता पाई जाए इसका राज बताते हुए उन्होंने कहा कि गीता कामयाबी की वह कुंजी है, जिसमें समस्या व उसके समाधान दोनों की ही बात कही गई है।
लगन, सकारात्मक उर्जा, ग्रहण क्षमता व कार्य का होना जीत के लिए जरूरी है। व्यक्ति को हीरे के समान बताते हुए उन्होंने कहा कि जिसमें हीरे की तरह कैरेट, कट, कलर और क्लीयरिटी होगी उसका स्थान उतना ही उच्च होगा।