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गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकास को जनआंदोलन से जोड़ने पर जोर देतहुए कहा कि आज गुजरात जहाँ पहुँचा है उसका कारण यही है, नरेंद्र मोदी की सिद्धि नहीं। अपने प्रेरक और बेबाक भाषण में मोदी ने कई उदाहरण देकर बताया कि क्यों आज गुजरात विकास के मामले में अन्य से बहुत आगे है।

आईएमए में किसी राजनीतिज्ञ को आमंत्रित नहीं करने की परंपरा के विपरीत मोदी द्वारा गुजरात के विकास में निभाई जा रही अग्रणी भूमिका के कारण उन्हें कॉन्क्लेव के उद्घाटन वक्ता का सम्मान दिया गया और इसीलिए उन्हें कार्यक्रम के दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री के बजाय गुजरात के सीईओ नाम से संबोधित किया गया। अस्वस्थता के कारण गाँधीनगर से वीडियो कांफ्रेंसिंग पर संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि आज जरूरत दायरे से बाहर (ऑउट ऑफ बाक्स) सोचने की प्रवृत्ति विकसित करने की जरूरत है।

मोदी ने कहा कि इसी दिशा पहल करते हुए हमने अदालतों के कामकाज में सुधार किया। सायंकालीन अदालत (ईवनिंग कोर्ट) शुरू कीं, अदालतों की छुट्‍टी 7 दिन कम कर दी, अदालत के नियमित समय में आधा घंटा बढ़ा दिया। इससे यह बदलाव हुआ कि 2003 में जहाँ पेंडेंसी (अदालतों में विलंबित मुकदमे) 1.5 करोड़ थी, वहीं 2009 में मात्र 18 लाख रह गई। 2010 में हम इसे शून्य स्तर पर ले आएँगे।

ऑउट ऑफ बाक्स सोचने का एक अन्य उदहारण देते हुए उन्होंने कहा कि किसी समय गुजरात राज्य बिजली बोर्ड पर 2.5 करोड़ का घाटा हुआ करता था, हमने बगैर बिजली दर बढ़ाए बोर्ड को आज 400 करोड़ रुपए के मुनाफे की स्थिति में ला दिया है। गुजरात के हर गाँव में 24 घंटे 3 फेज पर बिजली दी जा रही है। मोदी ने जोर देकर कहा कि विकास सिर्फ सरकार के भरोसे रहकर नहीं किया जा सकता है, इसे जनआंदोलन बनाना चाहिए।

मप्र क्यों नहीं आई नैनो : टाटा मोटर्स के सीईओ रविकांत ने कहा कि सिंगुर से नैनो संयंत्र अन्यत्र ले जाने के लिए हमारे पास 4-5 राज्यों के संयंत्र अपने राज्य में लाने का था। लेकिन मोदी ने परियोजना क्लींच (छीन) ली। उन्होंने हमसे कहा कि यह टाटा का नहीं बल्कि हमारा ज्वाइंट वेंचर है। इस तरह नैनो संयंत्र गुजरात चला गया।

रविकांत के भाषण के बाद आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में जब सवाल किया कि नैनो के लिए मप्र का भी आमंत्रण था, आप परियोजना यहाँ क्यों नहीं लाए, टाटा मोटर्स के सीईओ इसका सीधा जवाब टाल गए। बहरहाल उन्होंने इतना जरूर संकेत किया कि राज्यों को रिट्रोस्पेक्ट (आत्मावलोकन) करना चाहिए और जरूरत के मुताबिक चीजों में सुधार करना चाहिए। (कार्पोरेप्रतिनिधि)
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