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योजना आयोग ने आज उम्मीद जताई कि चालू वित्त वर्ष के दौरान अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहेगी और खाद्य वस्तुओं की महँगाई रबी फसल के आगमन के साथ कम होगी।

आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने आर्थिक संपादकों के सम्मेलन में यहाँ कहा कि वर्ष 2009-10 के लिए आर्थिक वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने का मेरा अनुमान है। आर्थिक वृद्धि दर के बारे में मोंटेक का अनुमान आयोग के पूर्व के अनुमान 6.3 प्रतिशत से कुछ अधिक है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने भी चालू वित्त वर्ष के दौरान आर्थिक वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

तीन साल लगातार नौ प्रतिशत की रिकॉर्ड आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने के बाद 2008-09 में वैश्विक मंदी के कारण यह गिरकर 6.7 प्रतिशत रह गई।

मुद्रास्फीति पर विशेषकर खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति पर चिन्ता व्यक्त करते हुए मोंटेक ने कहा कि अब कीमतें कम होना शुरू हो गई हैं और रबी की फसल आने के बाद आने वाले महीनों में ये और कम होंगी।

उन्होंने कहा, ‘हमें मुद्रास्फीति को लेकर चिन्ता है। रबी की अच्छी फसल के बाद खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति में कमी आएगी।’ मुदास्फीति की दर फिलहाल एक प्रतिशत के आसपास चल रही है, लेकिन खराब मानसून और देश के कुछ हिस्सों में सूखे के कारण खाद्य वस्तुओं की कीमतें उँची बनी हुई हैं।

सम्मेलन के दौरान आयोग की ओर से जारी एक दस्तावेज में उम्मीद जताई गई कि भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2010-11 में आठ प्रतिशत के स्तर पर पहुँच जाएगी जबकि इसके अगले साल इसके नौ प्रतिशत तक पहुँचने की उम्मीद है।

वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी ने भी कल आर्थिक संपादकों के सम्मेलन में कहा था कि अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर के नौ प्रतिशत के स्तर तक पहुँचने में एक साल या इससे कुछ अधिक समय लग सकता है।

दस्तावेज के मुताबिक 2010-11 और 2011-12 में मानसून सामान्य रहने और वैश्विक अर्थव्यवस्था के उबरने की स्थिति में भारतीय अर्थव्यवस्था के 2010-11 तक आठ प्रतिशत के स्तर पर पहुँचने की उम्मीद है।

दस्तावेज में कहा गया कि यदि निवेश विशेषकर बिजली और अन्य बुनियादी ढाँचा क्षेत्र में निवेश बढ़ा और कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों का असर होने लगा तो 11वीं योजनावधि के अंतिम साल 2011-12 तक अर्थव्यवसथा की वृद्धि दर नौ प्रतिशत के स्तर पर पहुँच सकती है।

आयोग का कहना है कि यह आँकड़ा आशावदी है पर ऐसा नहीं है कि इसे हासिल करना असंभव है। आयोग ने कहा कि यदि 11वीं योजनावधि के अंतिम दो वर्षों में अर्थव्यवस्था उबरती है तो इस पंचवर्षीय योजनावधि के दौरान औसत वार्षिक वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। यह वास्तविक लक्ष्य से कम है, लेकिन 10वीं योजनावधि में रिकार्ड की गई दर के लगभग समान है।
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