इन्फ्रास्ट्रक्चर होल्डिंग कंपनियों को अलग करें

उद्योग मंडल एसोचैम ने सरकार से किया आग्रह
नई दिल्ली (वार्ता), मंगलवार, 3 नवंबर 2009( 11:10 IST )
उद्योग मंडल एसोचैम और वेंचर कैपिटल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने बुनियादी क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए पूँजी जुटाने में मदद करने के उद्देश्य से इंफ्रास्ट्रक्चर होल्डिंग कंपनियों को गैरबैंकिंग वित्तीय कंपनियों की श्रेणी से बाहर करने का आग्रह किया है।
एसोचैम और एसोसिएशन ने कहा है कि वर्तमान में इन होल्डिंग कपंनियों को रिजर्व बैंक ने गैरबैंकिंग वित्तीय कंपनियों की श्रेणी में रखा है। इस श्रेणी में होने के कारण उन्हें अपनी जरूरतों के लिए पूँजी जुटाने पर रोक लगी है।
उनका कहना है कि बुनियादी क्षेत्र की कंपनियाँ वर्तमान में पूँजी के अभाव का सामना कर रही है, इसलिए उन्हें गैरबैंकिंग वित्तीय कपंनियों की श्रेणी से बाहर करने की आवश्यकता है।
इस तरीके से वे कपंनियाँ राजमार्ग, पुल एवं बंदरगाह आदि परियोजनाओं के लिए पूँजी जुटाने में सक्षम हो पाएँगी।
इन दोनों संगठनों का यह भी कहना है कि बुनियादी क्षेत्र की कंपनियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) से भी छूट दी जाना चाहिए, क्योंकि निजी निवेशक कंपनियाँ देश के बुनियादी क्षेत्र में 90 अरब डॉलर के निवेश के लिए तैयार हैं, लेकिन मैट लागू होने से यह इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए अवरोधक का काम कर रहा है।
एसोचैम की अध्यक्ष स्वाति पिरामल ने कहा है कि बुनियादी क्षेत्र की परियोजनाओं की आवश्यकताओं की पूर्ति और इन्फ्रास्ट्रक्चर होल्डिंग कंपनियों को गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की श्रेणी से बाहर करने के उद्देश्य से वित्त मंत्रालय को नए दिशा-निर्देश जारी करने के लिए रिजर्व बैंक से विचार-विमर्श करना चाहिए।
एसोचैम के अनुमान के अनुसार वर्ष 2012 तक बुनियादी क्षेत्र में 320 से 350 अरब डॉलर के निवेश की संभावना है और उनमें से 17 से 30 प्रतिशत हिस्सेदारी निजी निवेश की हो सकती है।