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तरलता की स्थिति सुधरने तथा कारोबारी भरोसा बढ़ने के कारण देश में विलय एवं अधिग्रहण (एमएंडए) तथा निजी इक्विटी गतिविधियों में सुधार दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी महीनों में इन सौदों में सुधार होगा।

वैश्विक बाजारों के आशावादी परिदृश्य का सकारात्मक असर सोमवार को देश में सौदों पर नजर आ रहा है।

वैश्विक सलाहकार फर्म अनर्स्ट एंड यंग के निदेशक तथा लेनदेन सलाहकार सेवाओं के भागीदार रंजन बिस्वास ने कहा कि नकदी की स्थिति में सुधार तथा निवेशकों की सौदों के प्रति इच्छा बढ़ने के कारण चालू तिमाही ने भारत के सौदों के बाजार में भविष्य में सुधार की भूमिका तैयार कर दी है।

कुछ इसी तरह की राय जाहिर करते हुए ग्रांट थार्नटन की विशेषज्ञता सलाहकार सेवाओं के पार्टनर सी जी श्रीविद्या ने कहा‘अगस्त माह में एमएंडए गतिविधियों में स्थिरता दिखाई दी है। इस दौरान 65 करोड़ डॉलर के 25 सौदे हुए। घरेलू स्तर पर हुए सौदों की इसमें मुख्य भूमिका रही है।'

अनर्स्ट एंड यंग के मुताबिक, 2009 की तीसरी तिमाही में 180 विलय एवं अधिग्रहण तथा प्राइवेट इक्विटी सौदे हुए। इन सौदों के कुल मूल्य में घरेलू लेनदेन की हिस्सेदारी 57 प्रतिशत रही।

इस बीच, ग्रांट थार्नटन के मुताबिक, 2009 के पहले आठ माह के दौरान एमएंडए सौदों की संख्या 183 रही और इनका मूल्य 6.56 अरब डॉलर रहा। इस साल अगस्त तक कुल प्राइवेट इक्विटी सौदों की संख्या 131 रही तथा इनका घोषित मूल्य 5.61 अरब डॉलर रहा। अनर्स्ट एंड यंग की ताजा सौदों पर तिमाही रपट में कहा गया है कि आगामी महीनों में कुल सौदों और वातावरण में सुधार होगा।

रपट में कहा गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में गिरावट की रफ्तार थमने के कारण निजी इक्विटी फंड घरानों के निवेश में वृद्धि देखने को मिलेगी।
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