देश के एक शीर्ष बैंकर का मानना है कि पहली तिमाही के बेहतर नतीजों और अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिखाई देने के बाद चालू वित्तवर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7से 7.5 प्रतिशत के बीच रह सकती है।
आईसीआईसीआई बैंक के गैर कार्यकारी चेयरमैन के वी कामत ने सोमवार को यहाँ संवाददाता सम्मलेन में कहा,‘विनिर्माण क्षेत्र पटरी पर आ रहा है। बुनियादी ढाँचा खासकर उर्जा क्षेत्र में भी काफी तेज सुधार दिखाई दिया है। मेरा मानना है कि हम चालू वित्त वर्ष में 7 से 7. 5 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर हासिल कर सकते हैं।’
कामत का यह अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक के जुलाई में लगाए गए कम से कम छह प्रतिशत की वृद्धि दर के अनुमान से कहीं ज्यादा है। उन्होंने कहा कि यदि मानसून की स्थिति खराब रहती है, तो वृद्धि दर सात प्रतिशत रह सकती है। लेकिन यदि इसमें सुधार होता है, तो वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत तक जा सकती है।
कामत ने कहा कि पिछले तीन माह के दौरान आईसीआईसीआई बैंक के कई कॉरपोरेट ग्राहकों ने अपनी परियोजनाएँ दोबारा शुरू की हैं, जो वित्तीय बाजारों में मंदी के कारण पूर्व में बंद कर दी गई थीं।
कामत ने कहा कि तेल, सीमेंट, वाहन और सेवा क्षेत्र अब मंदी से उबरने लगे हैं। हालाँकि निर्यात आधारित कई क्षेत्र मसलन कपड़ा उद्योग आज भी चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट और आवास रिण के ग्राहकों को हाल के दिनों में कर्ज का वितरण बढ़ा है और इसमें और सुधार आने की उम्मीद है।
कामत ने कहा कि बैंकिंग तंत्र के पास पर्याप्त तरलता है। नीति निर्माताओं द्वारा उठाए गए कदमों की वजह से बैंकिंग तंत्र में तरलता की स्थिति अच्छी है। उन्होंने कहा,‘तरलता विकास के रास्ते की बाधा नहीं बनेगी।’ब्याज दरों के बारे में उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में कर्ज महँगा होने के आसार नहीं हैं।