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फिर खुलेगा विनिवेश का पिटारा
सरकार ने विनिवेश कार्यक्रम को एक बार फिर शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत सार्वजनिक उपक्रमों में आम निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ाई जाएगी। उसने स्पष्ट किया है कि इन इकाइयों में वह कम से कम 51 प्रतिशत हिस्सेदारी रखेगी और बैंक तथा बीमा कंपनियाँ सरकार के अधीन ही रहेंगी।

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने 2009-10 में विनिवेश प्रक्रिया से 1120 करोड़ रुपए जुटाने का अनुमान व्यक्त किया है। इसमें राइट्स, कोच्चि शिपयार्ड, टेली कम्यूनिकेशंस कंसलटेंट्स इंडिया लिमिटेड, मेंगनीज कोर इंडिया लिमिटेड, राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड तथा सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड में विनिवेश शामिल है।

लोकसभा में 2009-10 का बजट पेश करते हुए यह घोषणा की। उन्होंने कहा सार्वजनिक उपक्रम राष्ट्र की संपदा है और इस संपदा का कुछ हिस्सा जनता के हाथ में होना चाहिए। हमारे उपक्रमों में कम से कम 51 प्रतिशत सरकारी हिस्सेदारी बनाए रखते हुए मैं लोगों को विनिवेश कार्यक्रम में शामिल होने को प्रोत्साहित करता हूँ।

मुखर्जी ने हालाँकि यह भी कहा कि बैंक तथा बीमा कंपनियाँ जैसे उपक्रम सार्वजनिक क्षेत्र में बने रहेंगे। उन्हें बढ़ने तथा प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए सभी तरह का समर्थन दिया जाएगा। उन्होंने वित्तीय क्षेत्र को किसी भी अर्थव्यवस्था का जीवन रक्त करार दिया।

बैंकों के राष्ट्रीयकरण के लिए इंदिरा गाँधी के साहसिक फैसले का जिक्र करते हुए मुखर्जी ने दोहराया कि सार्वजनिक बैंकों और बीमा कंपनियों को सरकार के अधीन ही रखे जाने की जरूरत है।

मुखर्जी ने कहा कि इसके साथ ही निजी व सार्वजनिक सभी सूचीबद्ध कंपनियों में सार्वजनिक तथा गैरप्रवर्तक अंशधारित सीमा बढ़ाई जाएगी।
उन्होंने कहा मैं सभी सूचीबद्ध कंपनियों में गैर प्रवर्तक सार्वजनिक अंशधारिता को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने का प्रस्ताव करता हूँ।
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