अपने फ्लैगशिप कार्यक्रमों के लिए धन जुटाने की प्रक्रिया में सरकार को उधारी पर काफी ज्यादा निर्भर करना पड़ेगा, क्योंकि इनका लक्ष्य हर एक रुपए पर 34 पैसे बढ़ा दिया गया है। यह पूर्व बजट में 14 पैसे था।
व्यय पर नजर डालें तो हर एक रुपए में 20 पैसे केन्द्रीय योजना पर खर्च होंगे, जबकि ब्याज भुगतान पर 18 पैसे का खर्च आएगा।
रक्षा क्षेत्र पर भुगतान पूर्व वर्ष में 11 पैसे था, जिसे इस बार बढ़ाकर 12 पैसे कर दिया गया है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के कारण हुई है।
सबसे अधिक आय के रूप में निगमित कर हर एक रुपए में 22 पैसे देगा, जो पूर्व वर्ष के मुकाबले कम है। पिछले वित्त वर्ष में निगमित कर की हर एक रुपए में 24 पैसे की हिस्सेदारी थी।
मंदी के दौर से प्रभावित अर्थव्यवस्था के मद्देनजर आयकर का हर एक रुपए में आठ प्रतिशत योगदान होगा, जो पूर्व बजट में 15 पैसे था। |