देश के बजट का आँकड़ा पहली बार 10,00,000 करोड़ रुपए के आँकड़े को पार कर गया है। इसमें यह जानना दिलचस्प होगा कि इतनी भारी रकम में हर एक रुपया कहाँ से आता है और कहाँ जाता है।
वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा सोमवार को लोकसभा में पेश 2009-10 के बजट के अनुसार सरकार की हर एक रुपए की प्राप्ति में 34 पैसे उधार से आते हैं, जबकि निगमित कर से 22 पैसे और व्यक्तिगत आयकर से नौ पैसे।
हर एक रुपए में 12 पैसे गैर कर राजस्व से आते हैं, जबकि नौ पैसे केन्द्रीय उत्पाद शुल्क से आते हैं। सीमा शुल्क से आठ पैसे हर एक रुपए में आते हैं। सेवा कर और अन्य करों का एक रुपए में पाँच पैसे का योगदान है, जबकि गैर कर पूँजी प्राप्तियों से एक रुपए में मात्र एक पैसा आता है।
दूसरी ओर सरकारी व्यय पर नजर डालें तो हर एक रुपए के खर्च में से 20 पैसे केन्द्रीय योजनाओं में, 19 पैसे ऋणों पर ब्याज भुगतान और 12 पैसे रक्षा पर खर्च होता है।
हर एक रुपए में से 14 पैसे करों और शुल्कों में राज्यों के हिस्से के रूप में तथा इतने ही पैसे गैर योजना व्यय के तहत खर्च होते हैं।
हर एक रुपए में दस पैसे आर्थिक सब्सिडी के रूप में, सात पैसे राज्यों और संघशासित प्रदेशों को योजना सहायता के रूप में तथा चार पैसे राज्यों और संघशासित प्रदेशों का गैर योजना सहायता के रूप में जाता है। |