प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने सोमवार को कहा कि वर्ष 2009-2010 के आम बजट का प्रयास वैश्विक मंदी के प्रभाव को कम से कम करना और मध्यम अवधि में 8 से 9 प्रतिशत विकास दर हासिल करना है।
प्रधानमंत्री ने आम बजट को ग्रामीण विकासोन्मुखी बताते हुए कहा कि इसका फोकस अर्थव्यवस्था की अल्पकालिक जरूरतों को सुनिश्चित करना और साथ ही मध्यकालिक लक्ष्यों को हासिल करना है।
लोकसभा में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा वर्ष 2009-10 का आम बजट पेश किए जाने के कुछ देर बाद ही प्रधानमंत्री ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि वित्तमंत्री ने सराहनीय काम किया है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल मुख्य चिंता भारतीय अर्थव्यवस्था पर वैश्विक मंदी के प्रभाव को कम से कम करना है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य मध्यम अवधि में 8 से 9 प्रतिशत विकास दर हासिल करने का होना चाहिए।
सिंह ने कहा कि समावेशी विकास और शहरी नवीकरण मिशन तथा राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के लिए इस बजट में अच्छी खासी अतिरिक्त धनराशि आवंटित की गई है। उन्होंने कहा कि यह निश्चित रूप से ग्रामीण विकासोन्मुख बजट है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अभी हमारी मुख्य चिंता भारतीय अर्थव्यव्स्था पर अंतरराष्ट्रीय मंदी के प्रभाव को कम से कम करना है और इसके लिए हमारी अर्थव्यवस्था को विशेष पैकेज मुहैया कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विशेष पैकेज मुहैया कराने की शुरुआत पिछले वर्ष दिसंबर में की गई थी और यह बजट इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है।
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना जैसे विभिन्न ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के लिए आवंटन में बढ़ोतरी के बारे में सिंह ने कहा कि एनआरईजीए के लिए 39100 करोड़ रुपए और भारत निर्माण कार्यक्रमों के लिए आवंटन में 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है और ये सब ऐसे कार्यक्रम हैं, जिनसे मुख्य रूप से हमारे ग्रामीण क्षेत्रों को फायदा होगा और भारत एवं इंडिया के बीच खाई को कम करेगा। |