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उपकर, अधिभार हटाने की जरूरत
बजट पूर्व पेश आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि सरकार को अधिभारों, कर पर लगाए जाने वाले उपकर तथा प्रतिभूति सौदा कर एवं फ्रिंज बेनिफिट टैक्स को समाप्त किए जाने की दिशा में कदम उठाना चाहिए। इससे बाजार और उद्योग जगत को प्रोत्साहन मिल सकता है।

संसद में पेश आज समीक्षा में जिंस सौदा कर की समीक्षा किए जाने की भी बात कही गई है। सीटीटी का प्रस्ताव वर्ष 2008-09 के बजट में शामिल था लेकिन उसे अधिसूचित नहीं किया गया।

समीक्षा में कहा गया है कि सीटीटी, एसटीटी और एफबीटी जैसे अधिभारों, उपकरों और सौदा करों की समीक्षा किए जाने और उसे समाप्त किए जाने की जरूरत है। स्टाम्प ड्यूटी के संबंध में राज्य सरकारों को इसी प्रकार का कदम उठाना चाहिए और इसके लिए उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए।

आर्थिक समीक्षा में लाभांश वितरण कर को युक्तिसंगत बनाए जाने को कहा गया है ताकि लाभांश पर वह व्यक्ति कर दे, जो उसे प्राप्त कर रहा है।

उद्योग जगत निगम कर को सरल बनाने तथा लोगों की व्यय योग्य आय को बढ़ाने के लिए अधिभारों को समाप्त किए जाने की माँग कर रहे हैं।

इसके अलावा कारोबारी एसटीटी हटाए जान की भी माँग कर रहे हैं। साथ ही 2005-06 के बजट में लाए गए एफबीटी को भी हटाने या उसे युक्तिसंगत बनाये जाने की माँग कर रहे हैं।
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