आर्थिक समीक्षा ने देश में एक नए दिवालिया कानून का सुझाव दिया है ताकि दिवालिया आवेदनों का तेजी से निपटारा सुनिश्चित किया जा सके।
समीक्षा में कहा गया है कि तीव्र एवं प्रभावी दिवालिये के लिए नया दिवालिया कानून हो ताकि संपत्तियों को वैकल्पिक इस्तेमाल के लिए बचाया, संरक्षित किया जा सके।
फिलहाल देश में कोई अलग दिवालिया कानून नहीं है बल्कि कंपनी कानून 1956 में ही दिवालिया संबंधी प्रावधान हैं।
इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (आईसीएसआई) के मुख्य कार्याधिकारी एवं सचिव एनके जैन ने बताया कि भारत में दिवालिया प्रक्रिया पूरी होने में 8-10 वर्ष या इससे भी अधिक समय लगता है। ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों में यह प्रक्रिया केवल दो साल में पूरी हो जाती है। |