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आर्थिक सर्वे में झलकेगा मंदी का असर
संसद में गुरुवार को पेश किया जाने वाला आर्थिक सर्वे वैश्विक आर्थिक संकट का भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर का आकलन पेश करेगा और आर्थिक वृद्धि बढ़ाने के लिए रणनीति बनाने में मदद करेगा।

उल्लेखनीय है कि 2008-09 में देश की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 6.7 फीसद पर आ गई, जबकि इससे पहले तीन वर्षों के दौरान यह 9 फीसद से अधिक थी।

पिछले वर्ष सितंबर के मध्य में अमेरिका के निवेश बैंकर के ढहने के बाद शुरू हुए वैश्विक आर्थिक संकट से भारत सहित विश्वभर की अर्थव्यवस्थाएँ बुरी तरह प्रभावित हुईं।

अक्टूबर में देश के निर्यात में गिरावट का रुख शुरू हो गया और वर्ष 2008-09 के दौरान औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर भी गिरने लगी।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर वैश्विक संकट के असर को कम करने के लिए सरकार ने तीन राहत पैकेजों की घोषणा की, जिससे राजकोषीय घाटा जीडीपी के छह फीसद से ऊपर चला गया, जबकि इससे पहले यह जीडीपी का 2.5 फीसद रहने का अनुमान जताया गया था।

बजट प्रस्तुत करने से पहले वित्तमंत्री द्वारा संसद में पेश किए जाने वाला आर्थिक सर्वे देश की अर्थव्यवस्था के बारे में सरकार के आकलन, समस्याएँ और उससे निपटने के उपाय प्रस्तुत करता है।
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