वाणिज्यिक उधारी तथा अल्पकालिक ऋणों में बढ़ोतरी के चलते भारत का बाह्य ऋण 2008-09 में 2.4 प्रतिशत बढ़कर 230 अरब डॉलर हो गया।
भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि आलोच्य अवधि में बाह्य ऋण बढ़कर जीडीपी का 22 प्रतिशत हो गया है, जो पहले 19 प्रतिशत था। इसके अनुसार भारत का ऋण, किश्त अनुपात कम है और यह चीन और मलेशिया के बाद तीसरे स्थान पर है।
कुल बाह्य ऋण में सबसे बड़ा हिस्सा वाणिज्यिक उधारी का है। वाणिज्यिक ऋण 27.3 प्रतिशत है। इसके बाद अल्प अवधि ऋण 21.5 प्रतिशत का स्थान है। |