सरकारी तेल उपक्रमों की हड़ताल से आपूर्ति गड़बड़ होने के कारण बिजली बनाने वाले सबसे बड़े उपक्रम एनटीपीपी के गैस और नाफ्था दोनों ईंधनों से चलने वाले सात में से छह संयंत्रों में गैस खत्म हो गई है और उन्हें नाफ्था पर चलाया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार इन संयंत्रों में नाफ्था का मात्र तीन दिन लायक भंडार ही बचा है। इनमें केवल गंधार (गुजरात) का संयंत्र ही है, जो अभी गैस (एलएनजी) से चल रहा है। नाफ्था से चलाए जा रहे बाकी छह संयंत्रों को आंशिक क्षमता पर ही चलाया जा रहा है। एनटीपीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक आरएस शर्मा ने यह जानकारी देते हुए कहा कि गैस न होने के कारण नाफ्था का सहारा लिया जा रहा है। नाफ्था का स्टॉक भी दो-तीन दिन का है।
एलएनजी और नाफ्ता दोनों प्रकार के ईंधनों से चल सकने वाले इन संयंत्रों में अंता 413 मेगावाट, ओरैया 652 मेगावाट, दादरी 817 मेगावाट, फरीदाबाद 430 मेगावाट, कावास 645 मेगावाट, गंधार 648 मेगावाट और कयमकुलम 350 मेगावाट संयंत्र शामिल हैं।
इनकी कुल क्षमता 3955 मेगावाट है और इन्हें 90 प्रतिशत क्षमता पर चलाने के लिए 173.5 लाख स्टैंडर्ड घनमीटर गैस प्रतिदिन चाहिए। |