आर्थिक मंदी रोकने के सरकारी प्रयासों तथा तेल कीमतों में और कमी की संभावनाओं के बीच मुद्रास्फीति की दर 27 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में पिछले 10 महीने के रिकॉर्ड गिरावट के साथ 5.91 प्रतिशत तक पहुँच गई। इससे पहले सप्ताह में यह 6.38 प्रतिशत थी।
मुद्रास्फीति की दर रिजर्व बैंक के वर्ष 2008-09 के अनुमान के मुताबिक 7 प्रतिशत के दायरे में रहने के कारण आर्थिक विश्लेषकों को उम्मीद है कि केन्द्रीय बैंक 27 जनवरी को मौद्रिक नीति की समीक्षा के दौरान ब्याज दरों में और कटौती कर सकता है ताकि आशंका से अधिक कीमत तेज रफ्तार से मंद पड़ रही अर्थव्यवस्था में नई जान डाली जा सके।
बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक मुद्रास्फीति की दर में अनुमान से कहीं अधिक तेजी से गिरी है और मार्च तक इसके 2 प्रतिशत तक पहुँच जाने की उम्मीद है। ऐसे में अर्थव्यवस्था में मजबूती लाने के लिए कुछ और वित्तीय और मौद्रिक उपायों की जरूरत पड़ सकती है।
दस खरब डॉलर वाली एशिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश भारत में पिछले तीन वर्षों के दौरान अर्थव्यवस्था में 9 फीसदी की रफ्तार पकड़ने के बाद वैश्विक मंदी की चपेट में आकर अब इसमें लगातार गिरावट के संकेत मिल रहे हैं।
बहरहाल वित्त बाजार में इसका कोई खास असर नहीं देखा जा रहा और डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत बना हुआ है। |