सत्यम कम्प्यूटर द्वारा की गई करीब 7,800 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के खुलासे से विश्व बैंक की छवि पर असर पड़ सकता है, क्योंकि उसने आईटी कंपनी की कॉरपोरेट अनियमितताओं के बारे में अपने संदेह पर पिछले महीने तक चुप्पी साध रखी थी।
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बैंक के अधिकारियों के हवाले से कहा कि साल 2006 में विश्व बैंक ने अमेरिकी न्याय विभाग के सामने संदेह जाहिर किया था कि हो सकता है सत्यम रिश्वत दे रही हो।
साल 2007 में बैंक ने आंतरिक जाँच पूरी कर ली थी और पाया कि सत्यम ने अनैतिक तरीके से काम किया। विश्व बैंक के नियमों के तहत कंपनी के पास दलील देने का एक मौका था कि उस पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए।
अखबार ने कहा कि फरवरी 2008 में विश्व बैंक ने सत्यम पर नए अनुबंधों के लिए बोली लगाने पर अस्थायी रूप से प्रतिबंध लगा दिया और फिर सितंबर में औपचारिक रूप से पाबंदी लगा दी, लेकिन बैंक ने इसे 23 दिसंबर तक प्रतिबंध करार नहीं दिया था। |